ट्राउट प्रजाति की मछली को बचाने का काम शुरू किया

नैनीताल झील के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने एवं लुप्तप्राय शीतजल मछली प्रजातियों के संरक्षण के उद्देश्य से कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित जंतु विज्ञान विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत झील में स्नोड्राउट स्थानीय रूप से “असेला” के नाम से जानी जाने वाली लुप्तप्राय स्नो ट्राउट प्रजाति के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य प्रारंभ किया गया है।
इस पहल के तहत आज नैनीताल झील में फिश केज स्थापित किया गया, जिसमें स्नो ट्राउट के फिंगरलिंग (शिशु मछलियाँ) को उनके विकास हेतु रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इन मछलियों का प्रजनन डीएसबी परिसर के जंतु विज्ञान विभाग की प्रयोगशाला में किया गया है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत ने बताया कि स्नो ट्राउट झील के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शैवाल को नियंत्रित कर जल की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है। इससे झील में अत्यधिक काई की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद नैनीताल की अध्यक्ष श्रीमती डॉक्टर सरस्वती खेतवाल, अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा तथा सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता का विशेष सहयोग रहा। विभाग अध्यक्ष
प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट ने बताया कि इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड मत्स्य कृषक विकास अभिकरण द्वारा नैनीताल जनपद की चार प्रमुख झीलों नैनीताल, भीमताल, सातताल एवं नौकुचियाताल में दो-दो फिश केज स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह कार्य राज्य मत्स्य विभाग, भीमताल एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस कार्य हेतु कुमाऊँ विश्वविद्यालय के आंतरिक अनुसंधान निधि तथा मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना का भी सहयोग प्राप्त हुआ है।
कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद नैनीताल की अध्यक्ष श्रीमती डा सरस्वती खेतवाल, अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा, प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. रीतेश साह, प्रो. आशीष मेहता सहित विश्वविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, शोधार्थी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।











