कुमाऊं विश्वविद्यालय में 13 वर्षों के बाद नई नियुक्तियां: प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत के प्रयासों से मिली बड़ी सफलता

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की बैठक के पश्चात, प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत के अथक प्रयासों एवं दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप, तेरह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद विश्वविद्यालय में नई नियुक्तियों की घोषणा की गई है। यह नियुक्तियां खुले चयन के आधार पर संपन्न हुई हैं।
फार्मेसी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर डॉ. बामा प्रसाद दत्त की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने सिंगापुर के प्रतिष्ठित नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से पीएचडी एवं पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप प्राप्त की है। उनके छब्बीस उच्च प्रभाव वाले शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं, जिन्हें अब तक ग्यारह सौ नब्बे से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है। विशेष उल्लेखनीय यह है कि डॉ. दत्त कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास में विदेशी विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त करने वाले पहले नियुक्त शिक्षक हैं। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रमाण है, अपितु विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भूगोल विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर डॉ. मीनू रानी की नियुक्ति की गई है। वे एक अत्यंत प्रतिभाशाली एवं अनुभवी शोधकर्ता हैं जिनके तैंतालीस शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। उनके शोध कार्य को अब तक बाईस सौ से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है और उनके नाम एक पेटेंट भी दर्ज है, जो उनकी शोध की व्यावहारिक उपयोगिता को रेखांकित करता है।
कम्प्यूटर विज्ञान विभाग में डॉ. रमेश चन्द्र बेलवाल को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी विशेषज्ञता एवं अनुभव से विभाग को नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी। अंग्रेजी विभाग में डॉ. जिबू साबू एम. की नियुक्ति एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हुई है। उनके शोध पत्र स्कोपस अनुक्रमित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं और उनकी एक पुस्तक विश्व के सर्वप्रतिष्ठित प्रकाशन गृह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त, प्रो. प्रीति आर्या का चयन भी एसोसिएट प्रोफेसर पद हेतु किया गया है। प्रो. आर्या की विशिष्ट उपलब्धि यह है कि उनकी एक पुस्तक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट) द्वारा प्रकाशित की गई है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान है और यहाँ से पुस्तक प्रकाशित होना किसी भी विद्वान के लिए अत्यंत गौरव की बात मानी जाती है। उनकी यह उपलब्धि कुमाऊं विश्वविद्यालय के लिए निश्चित रूप से एक बहुमूल्य योगदान सिद्ध होगी।समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर के उच्च पद पर प्रो. दीपक पालीवाल की नियुक्ति की गई है। उनके गहन अनुभव एवं विद्वता से विभाग को सशक्त नेतृत्व मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, श्री चारु चन्द्र तिवारी को विश्वविद्यालय के उप पुस्तकालयाध्यक्ष के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है।
कुलपति प्रो. रावत ने नवनियुक्त शिक्षकों के समक्ष स्पष्ट अपेक्षाएं रखते हुए कहा कि यह नियुक्ति केवल एक अवसर नहीं, अपितु एक दायित्व भी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी नवनियुक्त शिक्षकों को परिवीक्षा काल की पुष्टि से पूर्व स्कोपस अथवा समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्हें एक शोध परियोजना भी हासिल करनी होगी। इन शर्तों की पूर्ति न होने पर परिवीक्षा काल की पुष्टि नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय की ओर से पांच वर्षों तक किसी भी नवनियुक्त को अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी प्रदान नहीं किया जाएगा, ताकि वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ विश्वविद्यालय की सेवा कर सकें।
कुलपति प्रो रावत ने सभी नवनियुक्त शिक्षकों एवं अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि ये नियुक्तियां विश्वविद्यालय को नई शक्ति एवं ऊर्जा प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रतिभाशाली एवं अनुभवी विद्वानों के आगमन से कुमाऊं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध की साख राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ होगी।
उल्लेखनीय है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल का एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है, जहां हजारों विद्यार्थी अपने भविष्य के सपने संजोते हैं। वर्षों से रिक्त पड़े इन पदों के कारण शिक्षण एवं शोध की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। ऐसे में कुलपति प्रो. कर्नल दिवान सिंह रावत की दूरदर्शिता एवं प्रशासनिक कुशलता से संपन्न हुई ये नियुक्तियां न केवल विश्वविद्यालय परिवार के लिए, अपितु समूचे कुमाऊं अंचल के शिक्षा जगत के लिए एक शुभ संकेत हैं। विश्वविद्यालय परिवार को अब पूर्ण विश्वास है कि ये नवनियुक्त विद्वान अपनी प्रतिभा, परिश्रम एवं समर्पण से कुमाऊं विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।