राष्ट्रीय ऑर्किड दिवस विशेष

नैनीताल । 16 अप्रैल का दिन राष्ट्रीय ऑर्किड दिवस के रूप में मनाया जाता है ।यह दिवस
प्रकृति के सबसे खूबसूरत और विविधतापूर्ण फूलों को सम्मान देने का दिन है । इनकी कोमल पंखुड़ियाँ, चमकीले रंग और समृद्ध प्रतीकवाद ने बागवानों, फूल विक्रेताओं और पुष्प प्रेमियों को मोहित किया है। आज का दिन इन फूलों की सुंदरता की सराहना के साथ उन कहानियों और भावनाओं को समझने का हैं जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऑर्किड प्रेम, सौंदर्य, शक्ति और खूबसूरती का प्रतीक हैं। ग्रीस में, उर्वरता से जोड़ा गया तो विक्टोरियन इंग्लैंड में, ये दुर्लभ और महंगे तथा गहरे स्नेह और प्रशंसा को व्यक्त करने का प्रतीक है। ये कुल ऑर्किडेसी में आते है जो एक बीज पत्री है । ऑर्किड आफ नैनीताल पुस्तक में नैनीताल से 44 वंश तथा 87 प्रजातियां नैनीताल से बताई गई है तो उत्तराखंड में 73 वंश तथा 244 प्रजातियां एवं विश्व में 30440 प्रजातियां तथा एक लाख हाइब्रिड उपस्थित माने गए है जिसमें एशिया में 12000 नॉर्थ अमेरिका में 4000 ,अफ्रीका में 1700 तथा यूरोप की 180 प्रजातियां नेटिव अंकित की गई है ।सबसे लोकप्रिय कॉमन ऑर्किड में पहलेनोप्सिस (मॉथ ऑर्किड), डेंड्रोबियम, सीमिबिडियम (बोट ऑर्किड): योनिसीडियम (डांसिंग लेडी): है ।सबसे बड़ा वंश: बल्बोफिलम लगभग 2,000 प्रजातियां मिलती है तो हेवेनरिया की 850 प्रजातियां मिलती है ।
ऑर्किड में सौंदर्य, संस्कृति और औषधीय गुणों के अद्भुत संगम में समाहित है। ये फूल प्रेम,, सुंदरता का प्रतीक माने जाते हैं। सजावट के अलावा, इनमें हवा को शुद्ध करने, तनाव कम करने और पारंपरिक चिकित्सा में घाव भरने, सूजन कम करने तथा खांसी-जुकाम के इलाज के लिए औषधीय महत्व के साथ ये टॉनिक ,एंटी एजिंग के लिए भी प्रयोग होते है । ऑर्किड का एक विशाल अंतरराष्ट्रीय बाजार है, जो कट-फ्लावर के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं।
ऑर्किड न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि ये अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय हैं।इसीलिएऑर्किड सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि परिपक्वता और दुर्लभ सुंदरता का प्रतीक है, जो जीवन के नए चरणों का स्वागत करता है”। डॉक्टर ललित तिवारी

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