कला वसुधा ‘ सांझी- प्रिया ‘ बी-८ ,डिफेंस कॉलोनी तेलीबाग,लखनऊ।आदरणीय महोदय/ महोदयासादर नमन। अत्र कुशलंच तत्रास्तु।

नैनीताल।
कला वसुधा ‘ सांझी- प्रिया ‘ बी-८ ,डिफेंस कॉलोनी तेलीबाग,लखनऊ।
आदरणीय महोदय/ महोदया
सादर नमन। अत्र कुशलंच तत्रास्तु।
‘कला वसुधा’ जनवरी – जून २०२६ संयुक्ताक – ५१-५२-विषय-“प्रचलित – अप्रचलित : राग – प्रसंग ” पंजीकृत डाक द्वारा आज सादर धन्यवाद प्राप्त हुआ।आपका ह्रदय से आभार।
कला वसुधा संयुक्तांक ५१-५२ में मेरे आलेख- “उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में लोक परक व शास्त्र परक प्रचलित और अप्रचलित राग” को प्रकाशित करने हेतु आपका आभार। तथा भविष्य में भी मैं आपसे इसी सहयोग व मार्गदर्शन की आकांक्षा करता हूं।
महोदय/महोदया,
कला वसुधा एक सम्पूर्ण त्रैमासिक पत्रिका है।महत्वपूर्ण है कि शोध परक,उद्देश्यपूर्ण ‘कला वसुधा ‘अपने सौदेश्य उत्कृष्ट प्रयासों के चलते वर्तमान में भी यथावत है।अच्छी विषय वस्तु के साथ साथ सुंदर कलेवर में पत्रिका का यह अंक भी पूर्व की तरह एक सन्दर्भ ग्रन्थ के रूप में है। कला वसुधा परिवार जिस तन्मयता से इस पुनीत कार्य में जुटे हुआ हैं वह वंदनीय व अनुकरणीय है।
हार्दिक शुभ कामनाओं सहित।
बृजमोहन जोशी
२३८/२ नया बाजार तल्लीताल नैनीताल।( उत्तराखंड) भारत.