बाल विकास में रंगमंच की अहम भूमिका —प्रो. सुरेखा डंगवाल

नैनीताल ।l दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रोजेक्ट कार्य के अंतर्गत देहरादून के विभिन्न विद्यालयों में बाल रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी विद्यालयों में तैयार किए गए नाटकों का मंचन किया जाएगा।

यह कार्यशाला देहरादून के रेनेसां द्रोण सीनियर सेकेंडरी स्कूल (डोईवाला), फिल्फोट पब्लिक स्कूल, सेंट पॉल हाई स्कूल (क्लेमेंट टाउन) तथा गुरुकुल कन्या महाविद्यालय सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में संचालित हो रही है।

इस बाल रंगमंच कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति कौशल का विकास करना है। इसके माध्यम से बच्चों को अभिनय, संवाद तथा सामूहिक कार्य की समझ प्रदान की जा रही है। साथ ही, यह कार्यशाला उनके व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता को भी प्रोत्साहित कर रही है।

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कार्यशाला में विभाग के छात्र-छात्राओं—राजेश भारद्वाज, सरिता जुयाल, ज्योत्सना इस्तवाल, भाविक पटेल, सरिता भट्ट, विनीत पवार, अनुराधा खडूरी, चेतना, प्रणव पोखरियाल, अंजेश कुमार, मुस्कान, सोनिया, जयशंकर, फरमान, रमन आदि—द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि रंगमंच व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और यदि इसकी शुरुआत विद्यालय स्तर से हो, तो विद्यार्थियों की नींव और अधिक मजबूत होती है।

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डीएसडब्ल्यू प्रो. एस. सी. पुरोहित ने कहा कि रंगमंच विभाग के छात्रों के लिए यह अनुभव उनके भविष्य की पहली सीढ़ी सिद्ध होगा।
विश्वविद्यालय की कार्यशाला के सफल आयोजन में थिएटर विभाग के प्राध्यापक डॉ. अजीत पंवार एवं डॉ. कैलाश कंडवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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