शोधार्थियों को डेटा विश्लेषण और शोध नैतिकता की दी जानकारी

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से आईसीएसएसआर प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम के दूसरे दिन शोधार्थियों को डेटा विश्लेषण, सांख्यिकीय परीक्षणों और शोध नैतिकता की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक आंकड़ा विश्लेषण के साथ शोध में मौलिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया।
प्रथम सत्र में डॉ. नरेंद्र सिजवाली ने डेटा की अवधारणा और उसके विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी। उन्होंने सहसंबंध (कॉरिलेशन) और काई-स्क्वायर परीक्षणों की उपयोगिता समझाते हुए शोध में आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण को महत्वपूर्ण बताया। दूसरे सत्र में डॉ. जिबू ने शोध नैतिकता, साहित्यिक चोरी और शोध में जवाबदेही से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए नैतिक मानकों का पालन, मौलिकता और उत्तरदायित्व जरूरी हैं। कार्यक्रम में पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. दीपक पालीवाल, डॉ. सरोज, आकांक्षा पंत, आयुष उनियाल, नीरज बिष्ट, रोहित जोशी समेत अन्य प्रतिभागी रहे। पाठ्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और नैतिक शोध के लिए व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है।











