कुमाऊं विश्वविद्यालय के मेरु परिसर की भूमि से अतिक्रमण हटाया, निर्माण कार्य का रास्ता साफ

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रस्तावित मेरु परिसर, पटवाडांगर में सोमवार को जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में अनधिकृत कब्जे और भवनों पर लगाए गए ताले हटाकर भूमि एवं भवनों पर विश्वविद्यालय का अधिकार स्थापित कराया गया। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब परिसर के विकास और निर्माण कार्य को गति मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
जानकारी के अनुसार, पटवाडांगर में उपलब्ध भूमि को जिला प्रशासन द्वारा बंदोबस्ती के बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय को मेरु परिसर के निर्माण के लिए आवंटित किया गया था। इसी भूमि पर भारत सरकार की महत्वाकांक्षी मेरु परियोजना के तहत विश्वविद्यालय के तीसरे परिसर के विकास की योजना बनाई गई है। इस परियोजना के अंतर्गत करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से रोजगारपरक, शोधोन्मुख और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जानी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, मेरु परियोजना के तहत डीएसबी परिसर में गणित विभाग, योग विभाग, परीक्षा भवन, संगीत विभाग तथा और अयारपाटा में आईटीईपी भवनों का निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। वहीं भीमताल परिसर में विधि संकाय एवं भेषज विज्ञान विभाग के भवन भी तैयार हो चुके हैं।
इसके विपरीत पटवाडांगर स्थित विश्वविद्यालय के तीसरे परिसर का निर्माण कार्य लंबे समय से बाधित था। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना में अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों के कारण कार्य समय पर शुरू नहीं हो सका। कुलपति प्रो (कर्नल) दीवान एस रावत ने इस संबंध में उच्च शिक्षा सचिव और क्षेत्रीय सांसद के समक्ष मामला उठाते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी तथा उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (यूसीबी) के निदेशक के रवैये पर नाराजगी भी जताई थी।
प्रभारी कुलसचिव के अनुसार, कुलपति ने कहा कि वर्ष 2023 में पटवाडांगर के निरीक्षण के दौरान पूरे क्षेत्र में कोई विशेष प्रगति नहीं दिखी थी, लेकिन बाद में अचानक सफाई, सौंदर्यीकरण और वैकल्पिक सड़क निर्माण जैसे कार्य शुरू किए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि मौजूदा मार्ग के समानांतर करीब 20 से 40 मीटर की दूरी पर सड़क निर्माण और फेंसिंग कर विश्वविद्यालय की पहुंच बाधित करने का प्रयास किया गया।
सोमवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी, राजस्व विभाग और थाना तल्लीताल व ज्योलिकोट पुलिस की मौजूदगी में भवनों पर लगाए गए ताले हटाए गए तथा संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कार्रवाई के दौरान भवनों में उपलब्ध सामग्री का भी पंचनामा तैयार किया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब परिसर का विधिवत कब्जा मिलने के बाद निर्माण एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 8 से 9 माह का समय दिया गया है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि निर्धारित समय सीमा में पटवाडांगर परिसर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा मिलेगी।
कुलपति प्रो. रावत ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरु परियोजना विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
विश्वविद्यालय की ओर से प्रभारी कुलसचिव राकेश विश्वकर्मा, निर्माण कार्य समीक्षा समिति के प्रभारी प्रो. महेंद्र राणा, डॉ. मनोज बिष्ट, अवर अभियंता संजय पंत, संपत्ति अनुभाग के कुलदीप सिंह समेत अन्य कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।











