मौनी अमावस्या पर विशेष

मौनी अमावस्या (माघ मास की अमावस्या) का महत्व मौन व्रत, गंगा स्नान, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और आत्म-चिंतन में है, जिससे मन, वाणी शुद्ध होती है, पापों का नाश होता है, पितृ दोष दूर होता है, और सुख-समृद्धि मिलती है; इस दिन संगम स्नान को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, . मौनी अमावस्या पर “ॐ मौनं परमं तपः” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” , “ॐ पितृ देवतायै नमः मंत्रों का मानसिक जाप (मन में) किया जाता है ।
इस दिन मौन रहकर साधना, ध्यान और पूजा करने से मन शांत होता है, इंद्रियां नियंत्रित होती हैं और आत्मिक शांति मिलती है, इसलिए इसे ‘मौनी’ अमावस्या कहते हैं.
।धर्म में मौनी अमावस्या एक पवित्र पर्व है, जिसे पूर्वजों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है । संस्कृत में मौनी का अर्थ है मौन, इसलिए यह दिन मौन में व्यतीत किया जाता है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। हमारे शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी तिथि में सभ्यता के आरंभकर्ता माने जाने वाले ऋषि मनों का जन्म हुआ था. ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन माँ गंगा का जल अमृतमय हो जाता है.।आज 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या है । धर्म में इस तिथि को बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने, भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.। ललित तिवारी

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