मांगों को लेकर आशाओं ने किया प्रदर्शन

नैनीताल। न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और नियमितीकरण समेत सात सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की गई। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि आशा कार्यकर्ता मातृ-शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उन्हें कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। कार्यभार लगातार बढ़ने के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है।
ज्ञापन में वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री की ओर से आशाओं को 11,500 रुपये मासिक मानदेय देने के आश्वासन को लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा और सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन पेंशन के लिए विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग उठाई गई। आशाओं को सेवानिवृत्ति पर दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की मांग भी की गई। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट बढ़ाने, आशाओं की छंटनी पर रोक लगाने, अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पद भरने की मांग की।
इसके बाद 22 नवंबर को प्रदेशभर की आशाएं देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगी। मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इस नीलम बिष्ट, हेमा ठठोला, इंदु बाला, दीपा अधिकारी, निर्मला चन्द्र, ममता व सुनीता समेत अन्य मौजूद रहे।











