कुदरत का कहर: ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ में भीषण ओलावृष्टि, बागवानों के अरमानों पर फिरा पानी

नैनीताल/रामगढ़: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आज प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। जनपद नैनीताल के ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों में हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों और बागवानों को खून के आँसू रुला दिए हैं। महज कुछ मिनटों के तांडव ने बागवानों की साल भर की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है।फलों के कटोरे में पसरा सन्नाटा……
रामगढ़ और धारी क्षेत्र, जिसे कुमाऊं का ‘फलों का कटोरा’ कहा जाता है, वहां इस समय आड़ू, पुलम, खुमानी और सेब के पेड़ों पर फूल खिल रहे थे। कई पेड़ों पर छोटे-छोटे फल आने शुरू ही हुए थे। बागवानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होगी, लेकिन अचानक हुई ओलावृष्टि ने इन उम्मीदों को जमींदोज कर दिया। सफेद ओलों की चादर ने पेड़ों को इस कदर चोट पहुंचाई है कि फूल और कच्चे फल टूटकर जमीन पर बिछ गए हैं।स्थानीय बागवानों का कहना है कि यह केवल फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे साल के सपनों, बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण पर हुआ प्रहार है। ओखलकांडा और धारी के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी ओलों ने नकदी फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।चंदन नयाल ने कृषि विभाग और उद्यान विभाग से पुरजोर निवेदन करते हैं किः तत्काल हर गांव में जाकर नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया और मुआवजा देने को कहा है

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