के वी के ज्योलीकोट की पहलः ‘पोषण वाटिका’ से ग्रामीण परिवारों में आएगी स्वास्थ्य और समृद्धि।

भीमताला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), ज्योलीकोट द्वारा भीमताल ब्लॉक के विभिन्न ग्राम सभाओं में महिला किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘पोषण वाटिका के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें साल भर रसायन मुक्त, ताजी सब्जियां उपलब्ध कराना है।प्रशिक्षण के दौरान दागड़, गेठिया, बेलुवाखान, गाँजा और भलयूटी गाँवों की महिलाओं को खरीफ के मौसम में सब्जियों के सफल उत्पादन की बारीकियां सिखाई गईं।
कार्यक्रम में महिलाओं को पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. सुधा जुकारिया ने गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने और कम लागत में वैज्ञानिक पद्धति से बीजों के रोपण की तकनीक बताई। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी जगह में पोषण वाटिका लगाकर परिवार की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।प्रशिक्षण के उपरांत महिलाओं को प्रोत्साहन स्वरूप उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत किस्म के बीज और पौधे वितरित किए गए। वितरण में मुख्य रूप से बैंगन, शिमला मिर्च, हरी मिर्च के साथ-साथ कडू, तोरई, लौकी, भिंडी, मूली और धनिया शामिल थे।मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों ने ‘वर्मी कम्पोस्ट’ (जय गोपाल) और केंचुआ खाद के महत्व पर प्रकाश डाला। महिलाओं को सिखाया गया कि कैसे वे घर पर ही जैविक खाद तैयार कर अपनी वाटिका को उपजाऊ बना सकती हैं, जिससे मिलने वाली सब्जियां स्वास्थ्य के लिए उत्तम हों।संस्थान का लक्ष्य इस प्रथम चरण के तहत क्षेत्र की 100 प्रगतिशील महिलाओं को जोड़ना है, ताकि वे अपने घरों में ‘पोषण वाटिका’ स्थापित कर सकें। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करेगी, बल्कि कुपोषण के खिलाफ जंग में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम प्रधान बीना जीना उपस्थित रहीं। उनके साथ ही दीपा शाह, प्राची, कमलेश जीना, चन्द्रा, तुलसी और हंसा सहित क्षेत्र की कई महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।कार्यक्रम के दौरान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजय चौधरी ने उपस्थित जनसमूह को ‘पोषण वाटिका’ के महत्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोषण वाटिका का मुख्य उद्देश्य न केवल ताजी और रसायनों से मुक्त सब्जियां प्राप्त करना है, बल्कि इसके माध्यम से परिवार के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार लाना भी है।डॉ. चौधरी ने वाटिका तैयार करने की तकनीकी बारीकियों और उससे होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में तकनीकी जानकारी साझा की। उपस्थित महिलाओं ने इस विषय में गहरी रुचि दिखाई और इसे अपने घरों में अपनाने का संकल्प लिया।











