हरिशयनी/देवशयनी एकादशी ( चातुर्मास) संस्कृति अंक -दिनांक -२५-०७-२०२६ आलेख -बृजमोहन जोशी


नैनीताल । आषाढ़ शुक्ल एकादशी को हरिशयनी/देवशयनी एकादशी कहते हैं। क्योंकि इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु चार माह तक क्षीरसागर में शयन करते हैं।
अतः विवाह आदि कोई भी शुभ कार्य इन दिनों में नहीं किया जाता।आषाढ़ से लेकर कार्तिक माह तक के ये चार माह जिनमें भगवान श्री हरि विष्णु शयन करते हैं ‘चातुर्मास ‘ के नाम से प्रसिद्ध है।
हमें पदम् पुराण में इस एकादशी का उल्लेख इस प्रकार मिलता है उसके अनुसार- हरिशयनी / देवशयनी एकादशी के दिन श्री हरि का एक स्वरुप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर तब तक शयन करता है जब तक आगामी कार्तिक की एकादशी नहीं आ जाती। यह कथा दैत्य मुर या बलि को युद्ध में परास्त कर बारह योजन लम्बी सिंहावती नामक गुफा में जाकर श्री हरि के सो जाने से सम्बंधित है। पुराणों के अनुसार श्री हरि विष्णु भगवान इस दिन से चार माह तक राजा बलि के द्वार में रहते हैं।
स्कन्द पुराण के अनुसार – ब्रह्मा जी ने नारदजी को बतलाया कि हे नारद! भगवान विष्णु ही सबको मोक्ष देने वाले तथा संसार सागर को पार करने वाले हैं। जो मनुष्य तिल मिश्रित एवं आंवला मिश्रित जल से अथवा बिल्ल पत्र के जल से चातुर्मास में स्नान करता है उसमें लेशमात्र भी दोष नहीं रह जाते।
वेद में अन्न को “ब्रह्म” कहा गया है। अन्न में ही प्राणों की प्रतिष्ठा है।अतः मनुष्य सदा अन्न एवं जल दान करें। अन्न और जल के समान दूसरा कोई दान न हुआ न होगा। अन्न दान सबसे उत्तम है, उसका न रात में निषेध है ना दिन में।
चातुर्मास में वट के पत्र में विशेषतः भोजन करना चाहिए। चातुर्मास व्रत का अनुष्ठान सभी वर्ण के लोगों के लिए महान फल दायक है। विष्णु, ब्राह्मण और अग्नि स्वरुप तीर्थ सेवन करें।
जैमिनी के अनुसार –
सूर्य के अर्क राशि पर रहते हुए आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक वर्षा कालिक चार महीनों में भगवान विष्णु का शयन होता है। यह श्री हरि की आराधना का पवित्र समय है। वर्षा के चार महीनों में जितने दिन मनुष्य जनार्दन के समीप रहकर व्यतीत करता है उतने समय तक वह प्रतिदिन अश्वमेघ यज्ञ के फल का भागी होता है। समुद्र के पवित्र जल में स्नान करके श्री पुरुषोत्तम का दर्शन करते हुए चातुर्मास व्रत का पालन करना मुक्ति का साधन माना गया है। चातुर्मास में श्री हरि शेष शय्या पर शयन करते हैं।
आप सभी महानुभावों को हरिशयनी एकादशी की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

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