सफल उद्यमी बनने के लिए महिलाएं विकसित करें नवाचारी सोच, एसीआईसी देगा तकनीकी व बाजार सहयोग: प्रबंधक हिमांशु तिवारी

देहरादून, 30 अक्टूबर 2026: कांवली गांव शास्त्री नगर (सहसपुर विकास खंड) में ग्रासरूट अवेयरनेस एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूट फॉर सोसायटी (गति) द्वारा ए.सी.आई.सी. उत्तरांचल विश्वविद्यालय फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन हेतु दो दिवसीय विशेष आजीविका संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण शिविर का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि ए.सी.आई.सी उत्तरांचल विश्वविद्यालय फाउंडेशन के प्रबंधक हिमांशु तिवारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में गति संस्था के कार्यक्रम संयोजक एडवोकेट पंडित अनुज शर्मा ने सभी अतिथियों का औपचारिक परिचय कराया। इसके उपरांत गति सोसायटी के सचिव नीरज उनियाल ने मुख्य अतिथि हिमांशु तिवारी, मास्टर ट्रेनर पूजा उनियाल एवं विशिष्ट अतिथि स्पेक्स संस्था के अध्यक्ष डॉ. बृज मोहन शर्मा को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) भेंट कर स्वागत व अभिनंदन किया।
सोसायटी के सचिव नीरज उनियाल ने समूह की महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु चलाए जा रहे अभियानों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि दीपावली और आगामी त्यौहारों के सीजन में पारम्परिक दीयों, सुगंधित धूपबत्ती, मोमबत्ती व समब्रानी कप की बाजार में मांग कई गुना बढ़ जाती है। आधुनिक समय में उपभोक्ता रासायनिक उत्पादों के स्थान पर शुद्ध व पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं तकनीकी कुशलता व उच्च गुणवत्ता के साथ इन उत्पादों का निर्माण करें, तो वे न केवल त्योहारी मांग को पूरा कर सकती हैं, बल्कि अपने घरों से ही एक सफल व टिकाऊ माइक्रो-एंटरप्राइज स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर सकती हैं।
मुख्य अतिथि एवं ए.सी.आई.सी. उत्तरांचल विश्वविद्यालय फाउंडेशन के प्रबंधक हिमांशु तिवारी ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल हुनर सीखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक साधारण उत्पादक से सफल उद्यमी बनने के लिए महिलाओं को अपने भीतर ‘इन्नोवेटिव माइंडसेट’ (नवाचारी सोच) विकसित करनी होगी। जब तक उत्पाद में नयापन, बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक प्रस्तुति नहीं होगी, तब तक बाजार में लंबी पहचान बनाना संभव नहीं है। उन्होंने प्रतिभागियों को भरोसा दिलाया कि ए.सी.आई.सी. उत्तरांचल विश्वविद्यालय फाउंडेशन उनके नवाचारों को पंख देने, तकनीकी मार्गदर्शन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने के लिए हर कदम पर पूर्ण सहयोग व संस्थागत सहायता प्रदान करेगा।
प्रबंधक हिमांशु तिवारी ने आगे जानकारी दी कि उत्तराखंड राज्य का पहला अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (एसीआईसी) उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किया गया है। यह केंद्र ग्रासरूट अवेयरनेस एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूट फॉर सोसायटी (गति) जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और आजीविकापरक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विशिष्ठ अतिथि डॉ बृज मोहन शर्मा द्वारा अपने संबोधन में कहा कि जिस समूह का नाम प्रेरणा हो उससे कई तरह की आशाएं बढ़ जाती है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जो कुछ भी आप सीखेगे उसको रोजगार के रूप में अपनाया जाएगा तो यह बहुत कम लागत वाला व अधिक मुनाफे वाला साबित होगा। हमें लगता है कि ये एक अच्छा अवसर है कि हम प्रशिक्षण प्राप्त कर कुछ आय अर्जित करने का संकल्प लें और अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से अपने लिए उचित रोजगार का चयन करें जो आपके परिवार की आय बढ़ाने में मदद व आपको आत्मसम्मान दे सके।
प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा सीमा तिवारी ने समूह की 6 वर्षों की विकास यात्रा साझा करते हुए बताया कि कोरोना काल के संकटपूर्ण समय में गति संस्था द्वारा उनके समूह का गठन कराया गया था। तब से लेकर आज तक संस्था ने उन्हें एल.ई.डी. बल्ब निर्माण, प्राकृतिक हर्बल रंग, सिलाई-कढ़ाई व सैनिटरी नैपकिन जैसे अनेक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि इन कौशलों के दम पर समूह की बहनें न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि सम्मानजनक आय अर्जित कर अपने परिवार को आर्थिक रूप से सबल बना रही हैं। उन्होंने इस उपयोगी प्रशिक्षण के लिए गति सोसायटी और उत्तरांचल विश्वविद्यालय का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
मास्टर ट्रेनर पूजा उनियाल ने कहा कि प्रशिक्षण बहुत लोग लेते हैं, लेकिन असली सार्थकता तब सिद्ध होती है जब महिलाएं सीखे गए ज्ञान को व्यावसायिक रूप देकर उद्यम शुरू करें। उन्होंने कहा कि स्वावलंबन से महिलाओं के व्यक्तित्व में अभूतपूर्व आत्मविश्वास पैदा होता है। कार्यशाला के प्रथम दिवस में उन्होंने प्रतिभागियों को पैराफिन व वैक्स मोमबत्तियां, पंचगव्य आधारित गोबर के दीए, प्राकृतिक धूपबत्ती तथा सकारात्मक ऊर्जा देने वाले सांब्रानी कप बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया और सुरक्षा सावधानियों की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में स्पेक्स अध्यक्ष डॉ. बृज मोहन शर्मा, पं. अनुज शर्मा,अश्वनी विशिष्ठ सहित समूह से जुड़ी लगभग 32 महिलाएं उपस्थित रहीं।













