जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया

नैनीताल । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल द्वारा 26 अक्टूबर, 2026 से 31 अक्टूबर, 2026 तक ‘‘सुरक्षित बचपन अभियान’’ के अंतर्गत लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत जागरुकता अभियान
उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा निर्देशानुसार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल द्वारा 26 अक्टूबर, 2026 से 31 अक्टूबर, 2026 तक ‘‘सुरक्षित बचपन अभियान’’ के अंतर्गत लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल / जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी के द्वारा लॉन्ग व्यू पब्लिक स्कूल तल्लीताल नैनीताल मे विधिक साक्षरता एवम् जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया . जिसमे जिला न्यायाधीश द्वारा छात्रों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012(पोक्सो एक्ट) के बारे में जानकारी दी गयी। साथ ही गुड़ टच, बैड टच,बाल अधिकार, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल संरक्षण, नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 से सम्बंधित विषय पर विस्तृत जानकारी दी गईl बताया देश के सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क, सुरक्षित और बाल-संवेदनशील कानूनी सहायता प्रदान करना है।18 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चे—चाहे वे कानून के विवाद में हों, देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता में हों, या फिर शोषण, तस्करी, बाल श्रम या यौन उत्पीड़न के शिकार हों (इसमें विकलांग बच्चे भी शामिल हैं)।निःशुल्क सेवाएं जैसे पैनल वकीलों , कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली और पारालीगल वालंटियर्स के माध्यम से पूरी तरह से निःशुल्क कानूनी सहायता दी जाती है। शिविर मे द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश कुलदीप शर्मा जी ने छात्रों को पॉक्सो एक्ट के सम्बन्ध मे बताया की अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम’ है। यह भारत में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है लैंगिक हमला इसमें कम से कम 7 साल से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।गुरुतर प्रवेश लैंगिक हमला ,इसमें कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा मिलती है। सामान्य लैंगिक उत्पीड़न इसमें 3 से 5 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।अश्लील सामग्री से सुरक्षा बच्चों से संबंधित पोर्नोग्राफी या अश्लील गतिविधियों पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।त्वरित सुनवाई: मामलों के संवेदनशील निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन किया गया है।आपातकालीन सहायता यदि कहीं भी बाल शोषण की घटना दिखे, तो तुरंत 1098 (चाइल्डलाइन) या 112 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ नालसा टोल फ्री नंबर 15100 पर भी संपर्क कर सकते हैं। अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल / जिला न्यायाधीश श्री प्रशांत जोशी जी द्वारा प्रधानाचार्य भुवन त्रिपाठी का धन्यवाद ज्ञापित किया जिनके सौजन्य से कम समय मे शिविर का सफलता पूर्ण आयोजन किया गया। शिविर मे सिविल जज (सी०डि०) / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल , उप प्रधानाचार्य कविता सनवाल अंबिका,यशवंत कुमार, इत्यादि मौजूद रहे।।