11वें हिमालयन इकोज़ की शुरुआत 30 अक्टूबर से, पर्वतीय राष्ट्रों का संगम बनेगा नैनीताल

नैनीताल। हिमालयी साहित्य, कला और पारिस्थितिकी को समर्पित बुटीक उत्सव हिमालयन इकोज़ अपने दूसरे दशक में विश्व के पर्वतीय राष्ट्रों के संगम स्थल के रूप में लौट रहा है। 11वां संस्करण 30-31 अक्टूबर 2026 को एबट्सफ़ोर्ड एस्टेट नैनीताल में आयोजित होगा। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और उत्तराखंड पर्यटन के सहयोग से हो रहा है।
हिमालयन इकोज की संस्थापक जानवी प्रसाद ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से यह उत्सव भारत, नेपाल और भूटान में पहाड़ों और वहां के लोगों की आवाज को बुलंद करता आया है। इस वर्ष उद्घाटन भूटान की चादोर वांगमो और भारत की मिथक विशेषज्ञ सुनीता पंत बंसल करेंगी। नेपाल के ऋषि अमात्य “राधा – द रैथ ऑफ द माएजू” प्रस्तुत करेंगे।दूसरे दशक में उत्सव का दायरा बढ़ा है। स्विट्जरलैंड, रूस और फ्रांस के वक्ता भी शामिल होंगे। स्विट्जरलैंड दूतावास ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में कर्टेन रेजर की मेजबानी की थी। स्विस वक्ता बेंजामिन वियात्ते “वॉकिंग बाबा” जिन्होंने भारतीय हिमालय तक पहुंचने के लिए 18 देशों से होकर 14 हजार किमी पैदल यात्रा की, पहली बार शामिल होंगे। रूस के व्लादिमीर जैतसेव “हिमालयन पैनोरमा” और असम में जन्मी फ्रांसीसी खगोल वैज्ञानिक प्रियंका राजकाकती “आवर प्लैनेट, आवर यूनिवर्स” सत्र में भाग लेंगी।
उत्सव में मिथक लेखक अमीश त्रिपाठी, खाद्य इतिहासकार रुशीना मुनशॉ घिल्डियाल, 2.6 करोड़ पेड़ लगाने वाले पीपल बाबा सहित उत्तराखंड के शिवेश्वर राज सिंह, अदिति सिंह साह और साहित्य अकादमी विजेता पारो आनंद भी शामिल होंगे।
इस बार रैडिसन हिमालयन इकोज़ नेचर प्राइज 2026 जलवायु उद्यमी मृदुला रमेश को दिया गया है। वे सुंदरम क्लाइमेट इंस्टीट्यूट की संस्थापक और “द क्लाइमेट सॉल्यूशन” की लेखिका हैं। निर्णायक समिति में नमिता गोखले, जाह्नवी प्रसादा और संजय के रॉय शामिल थे। जाह्नवी प्रसादा ने कहा कि हिमालय जिन प्रश्नों का सामना कर रहा है, वे हर पर्वतीय समुदाय के साझा प्रश्न हैं।