प्रो. अतुल जोशी के सेवानिवृत्त होने पर शिक्षा संकाय में भावपूर्ण विदाई समारोह आईटीईपी की स्थापना से नए भवन तक की विकास यात्रा में रहा महत्वपूर्ण योगदान

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के शिक्षा संकाय के अंतर्गत संचालित इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) द्वारा शिक्षा जगत के वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. अतुल जोशी के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर एक भावपूर्ण विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षा संकाय एवं आईटीईपी के शिक्षकों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों ने प्रो. जोशी के दीर्घ एवं गौरवपूर्ण शैक्षणिक तथा प्रशासनिक जीवन को स्मरण करते हुए उनके योगदान के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि वाणिज्य विषय के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. जोशी ने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में विश्वविद्यालय की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ कुशलतापूर्वक निभाईं। उन्होंने वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष और संकायाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जबकि वर्ष 2020 से वे शिक्षा संकाय के संरक्षक एवं संकायाध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे और शिक्षा के क्षेत्र में अनेक पहलों को दिशा व प्रशासनिक सहयोग प्रदान करते रहे।आईटीईपी की स्थापना में निभाई अहम भूमिकासमारोह में विशेष रूप से चर्चा हुई कि कुमाऊँ विश्वविद्यालय में चार वर्षीय आईटीईपी कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हुई थी, जो विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास की एक बड़ी उपलब्धि रही। देश के चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों में कुमाऊँ विश्वविद्यालय को भी यह कार्यक्रम संचालित करने का अवसर मिला, लेकिन शुरुआती दौर में पाठ्यक्रम, कक्षाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विभिन्न स्तरों पर समन्वय जैसी अनेक चुनौतियाँ सामने आईं। शिक्षा विभाग परिवार के अनुसार, इस चुनौतीपूर्ण दौर में प्रो. जोशी ने निरंतर मार्गदर्शन, संरक्षण एवं प्रशासनिक सहयोग देकर कार्यक्रम को धीरे-धीरे स्थायित्व दिलाया। उन्होंने आईटीईपी को केवल एक नए कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के दक्ष एवं संवेदनशील शिक्षक तैयार करने की सशक्त व्यवस्था के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोरवक्ताओं ने बताया कि प्रो. जोशी ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों के समग्र विकास को सदैव प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में अकादमिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की सहभागिता और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा मिला, तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, विद्यालयी अनुभव, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा गया। विद्यार्थियों ने बताया कि प्रो. जोशी केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि उनके मार्गदर्शक और संरक्षक भी रहे-उनकी सहज उपलब्धता और समस्याएँ सुनने की तत्परता ने उन्हें विशेष स्थान दिलाया।नए भवन की उपलब्धि रही अहम पड़ावसमारोह में बताया गया कि नए शिक्षा संकाय भवन का निर्माण और उसमें आईटीईपी का प्रवेश विभाग की एक बड़ी उपलब्धि है, जो वर्षों के प्रयास, संघर्ष और संस्थागत सहयोग का परिणाम है। भवन से जुड़ी आवश्यकताओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए प्रो. जोशी के निरंतर प्रयासों को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। नए भवन में प्रवेश को विभाग की विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, जिसे प्रो. जोशी के कार्यकाल की महत्वपूर्ण विरासत के रूप में याद किया जाएगा।कुलपति व प्रशासन के योगदान का भी उल्लेखसमारोह में तत्कालीन कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के नेतृत्व और विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग को भी विशेष रूप से स्मरण किया गया। आईटीईपी के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक उप्रेती ने कहा कि आईटीईपी का वर्तमान स्वरूप कुलपति के नेतृत्व और प्रो. जोशी के मार्गदर्शन का साझा परिणाम है। उन्होंने प्रो. जोशी की भूमिका की तुलना एक अभिभावक से करते हुए कहा कि जिस प्रकार माता-पिता प्रेम और संरक्षण देकर बच्चे को बड़ा करते हैं, उसी प्रकार प्रो. जोशी ने आईटीईपी को स्थापना से वर्तमान स्वरूप तक पहुँचाया।भावुक विदाई और गुरु-मंत्रसमारोह में आईटीईपी परिवार की ओर से प्रो. जोशी को शॉल, पुष्पगुच्छ, उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी, मालाएँ और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में प्रो. जोशी ने विश्वविद्यालय, सहकर्मियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की असली शक्ति उसके शिक्षक, विद्यार्थी और सामूहिक भावना में निहित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, समय के सदुपयोग, कर्तव्यनिष्ठा और संस्थान की गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया। आईटीईपी परिवार ने कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का एक औपचारिक पड़ाव है, योगदान का अंत नहीं।समारोह में विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक उप्रेती, डॉ. पुष्पा अधिकारी, डॉ. तेज प्रकाश जोशी, डॉ. वर्षा पंत, डॉ. आकांक्षा शैली, डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. विनीता विश्वकर्मा, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. हेमा मेहरा, डॉ. दीपिका भट्ट, डॉ. भूपेन्द्र सिंह, डॉ. शाहिद हुसैन, डॉ. ललिता जोशी, डॉ. सुरभि बिष्ट, डॉ. विशाल बिष्ट, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. मिराज, मठपाल जी, हरीश, सुमन, अनुभा, आयुष्मान, अनुश्रुत, हिमांशी, प्रतिभा आदि ने समारोह में सहभागिता की।











