खेती, पशुपालन, मत्स्य और मधुमक्खी पालन से जुड़ी चुनौतियों पर वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध आधारित सुझाव

नैनीताल। पटवाडांगर में आयोजित छठे बायोटेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव में देश-विदेश से पहुंचे वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और उनके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा कर रहे हैं। 24 से 26 सितंबर तक चल रहे तीन दिवसीय आयोजन में दूसरे दिन किसानों की समस्याओं के समाधान और शोध को खेती-किसानी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कॉन्क्लेव में प्लांट, एनिमल और ह्यूमन बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों से पहुंचे शोधार्थी अपने शोध और तकनीकी अनुभव साझा कर रहे हैं। इस दौरान सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन में किसानों को आ रही समस्याओं पर भी चर्चा की जा रही है।

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संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं। उद्देश्य है कि जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े शोध और नई तकनीकों के जरिये किसानों को व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराए जा सकें। बताया कि

कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता भी देखने को मिल रही है। सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट वेटरनरी यूनिवर्सिटी, रूस के साथ एमओयू किया गया है। विश्वविद्यालय के वाइस डायरेक्टर डॉ. सर्जी और सेंट पीटर्सबर्ग की डॉ. वैलेरिया ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके अलावा सोमालिया से शोध कर रहे विद्यार्थी भी कॉन्क्लेव में शामिल हुए हैं। आयोजकों ने बताया कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत विभिन्न देशों के वैज्ञानिक ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान दे रहे हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शोध एवं अनुभवों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इस दौरान संस्थान के प्रभारी डॉ सुमित पुरोहित, डॉ. उदयवीर, जगधारी व अन्य लोग मौजूद थे।