नैनीताल की रामलीला में अभिनय कर मुस्लिम युवको ने सौहार्द की मिसाल कायम की

नैनीताल। नगर के विभिन्न स्थानों में रामलीला शुरू हो गई है। नगर में 5 स्थानों में रामलीला बीती शाम से शुरू हो गई है। वहीं नगर के सुखाताल स्थित रामलीला में 2 मुस्लिम युवकों ने सौहार्द की मिसाल पेश की है। 2 मुस्लिम युवक पिछले 25 सालों से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं। अनवर रजा कई सालों से केवट बनकर श्रीराम की नैया पार लगा रहे हैं। तो नासिर बीस सालों से गुरु वशिष्ठ बनकर श्रीराम और लखन को शस्त्र विद्या का ज्ञान दे रहे हैं। नैनीताल में होने वाली राम लीलाओं में मुस्लिम समाज के लोग सालों से इसी तरह अपना योगदान दे रहे हैं। पात्रों के मेकअप से लेकर रामलीला में अभिनय तक में इनकी बड़ी भूमिका रहती है।
शास्त्रों के अनुसार रामराज्य में जात पात का भेदभव नहीं था। इसलिए नैनीताल की रामलीलाओं में भी जाति धर्म को किनारे रख हर वर्ग से लोग अपना योगदान सालों से देते आ रहे हैं। नैनीताल में कई मुस्लिम समुदाय के लोग राजगुरु, पुरोहित, मारीच, केवट से लेकर कई दूसरे किरदारों को मंच पर उतारते रहे हैं। वहीं नासिर अली बीते बीस सालों से मारीच, गुरु वशिष्ठ के पात्रों का अभिनय करते हैं। नासिर का कहना है की रामलीला में जाति धर्म का कोई स्थान नहीं। वह सालों से रामलीला मंचन में शिरकत कर रहे हैं। रामलीला में पात्रों का मंचन कर उन्हें बेहद सुकून महसूस होता है। अनवर रजा और जावेद राम कार्य में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। अनवर रजा तो हर साल केवट और मुनि का अभिनय करते हैं। अनवर व नासिर ने बताया कि परिवार से उन्हें पूरा सहयोग मिलता है तथा वह रामलीला में भाग लेने के लिए कई महीनों से तालीम करते हैं।

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