अहंकार एवं कामना रूपी महिषासुर तथा रक्तबीज राक्षसों का संघार जरूरी : श्री नमन कृष्ण।

नैनीताल l शेर का डांडा में नव साँस्कृतिक सत्संग समिति द्वारा आयोजित देवी भागवत में धर्म मार्तण्ड व्यास भागवत किंकर श्री नमन कृष्ण महाराज जी ने आपके अन्दर के राक्षसों का संघार करने की आवश्यकता पर बल दिया। व्यास जी ने देवी की महिमा को मूर्त रूप में समझाते हुए कहा कि महिषासुर का शाब्दिक अर्थ महिष अर्थात अहंकार का मर्दन है। ऐसे ही देवी ने रक्तबीज का वध किया, रक्तबीज हमारी अनंत कामनाएं हैं जो एक के बाद एक पैदा होती रहती हैं। मधु कैटभ प्रशंसा रूपी विकार हैं।
इन्हीं सब से बचने का तरीका सत्संग और प्रार्थना है। देवी भागवत जैसे आयोजनों से व्यक्तियों को एवं समाज को प्रकाश मिलता है। देवी भागवत के समापन अवसर पर होने वाले महायज्ञ हेतु महिलाओं ने पारंपरिक ढंग से हवन वेदिका को गेरू लगाकर उसमें चावल पीस कर बने बिस्वार से ऐपण देकर तैयार किया।
इसमें लता रावत, सुमन रावत, हिमांशु तिवारी के नेतृत्व में चित्रा पंत, ममता जोशी, बीना कंचन चंदोला, तनुजा बिष्ट, पार्वती बिष्ट, बबीता उपाध्याय, हेमा पांडे, नीमा जोशी, रमा पाठक, सहित भजन संध्या में दीपा पांडे, बीना चंदोला के नेतृत्व में गीता दत्ता, विमला पंत, अनुराधा, चम्पा, कमला बुधलाकोटी, आशा बिष्ट, पूनम पांडे, कमला बिष्ट, ज्योति चौधरी, प्रेमा पांडे, गुड्डी आदि द्वारा वातावरण को भक्तिमय बनाने में योगदान दिया गया।

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