विनम्र श्रद्धांजली।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹!! दूसरी पुण्यतिथि पर परम्परा ने किया याद प्रसिद्ध छायाकार ए.एन. सिंह जी को !!दिनांक ०८-०५-२०२६
नैनीताल। । पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल द्वारा बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी प्रसिद्ध छायाकार शिक्षाविद् (सेवा निवृत्त) प्रधानाचार्य, संस्कृति कर्मी, खिलाड़ी, तैराक, ए.एन.
सिंह (गुरु जी) को किया गया याद।
पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल के निर्देशक बृजमोहन जोशी द्वारा ए.एन.सिंह जी को उनकी दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। श्रृद्धांजलि अर्पित करने के उपरांत जोशी द्वारा अपने सम्बोधन में ए.एन.सिंह जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बतलाया कि ए.एन. सिंह जी का जन्म नैनीताल में ५ मार्च १९३९ को हुआ। आपके पिता जी का नाम स्व.योगी राज
सिंह माता जी का नाम स्व.श्रीमती लक्ष्मी देवी था। आपकी धर्म पत्नी का नाम श्रीमती दीपा बिष्ट है।
आपने डी.एस.बी.परिसर
नैनीताल से एम.एस.सी.
तथा एल.टी.की परीक्षा लखनऊ से उत्तीर्ण की। वर्ष १९९६ में आपकी नियुक्ति लाला चेतराम साह ठुलघरिया इण्टर कालेज नैनीताल में बाइलाजी के लैक्चरर के पद पर हुई तथा उसके बाद प्रधानाचार्य के पद से आप इसी चेतराम साह इण्टर कालेज से सेवा निवृत्त हुए। आपने हाकी फुटबॉल, किक्रेट, टेनिस, स्केटिंग, तैराकी, बाड़ी बिल्डिंग फैंसी ड्रेस के साथ साथ रंग मंचीय विधाओं में भी अपनी भागीदारी की। तैराकी में तो आप बतलाते थे कि नैनी झील को तल्लीताल से मल्लीताल तक पार कर लेते थे। शरदोत्सव नैनीताल में बाड़ी- बिल्डिंग प्रतियोगिता में आप मिस्टर नैनीताल रहे। फोटोग्राफी का शौक बचपन से था। वर्ष १९६८ मे पिंडारी ग्लेशियर कि यात्रा की तथा जीमखाना नैनीताल में “पिंडारी यात्रा वृत्तांत” शीर्षक कि एक एकल प्रदर्शनी लगाई। आपने १९९९ में इण्डिया इण्टर नैशनल फोटोग्राफी काउंसिल नई दिल्ली कि सदस्यता प्राप्त कि और राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिताओं में सहभागिता करनी आरम्भ कि। वर्ष २००४ मे आपको इण्डिया इण्टर नैशनल फोटोग्राफी काउंसिल नई दिल्ली द्वारा कांस्य , वर्ष २००८ में रजत, वर्ष २०१२ मे स्वर्ण, वर्ष २०१४ प्लैटेनिम ग्रेडिंग अवार्ड से सम्मानित किया तथा I I P C New Delhi द्वारा चयनित देश के दस सर्व श्रेष्ठ छायाकारों में भी आप शामिल रहे। गुरु जी एक ऐसे फनकार थे जिनके सानिध्य में तरह तरह के लोग पनपते चले गये। और मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे उनका सानिध्य मिला क्योंकि मैं भी लाला चेत राम साह ठुल घरिया इण्टर कालेज मै वाणिज्य विषय का छात्र रहा हूं। गुरु जी कि अनेक विशेषताओं में एक विशेषता यह भी थी कि वो हमेशा एक अभिभावक के रूप में हमें चीजों को समझाते थे। एक शरारती नट खट बच्चे की तरह वो छोटी छोटी बातों में थोड़ी देर के लिए नाराज भी हो जाया करते थे और फिर स्वयं कुछ ही देर में मान भी जाते थे। अपनी स्मृतियों की, अपनी शरारतों की तथा अपने समय की महत्वपूर्ण जान कारियों को गुरु जी अपने एक खास अन्दाज में हमसे सांझा किया करते थे। हम लोगों का हमेशा मार्ग दर्शन किया करते थे। अक्सर पहले मल्लीताल शर्मा वैष्णव भोजनालय में नींबू की चाय होती उसके बाद बलवीर भाई के कार्यलय भारतीय स्टेट बैंक में, घर तो लगभग हर रोज गुरु वाणी सुनते सुनते मै, गुरु जी,कल्याण सिंह सजवान,
अहद तनवीर, मोहन सिंह बिष्ट मोहन दा कभी कभी पदम् श्री अनूप साह जी आदि चाय और नमकीन के साथ साथ इण्डिया इण्टर नैशनल फोटो ग्राफी काउंसिल नई दिल्ली द्वारा आयोजित फोटो प्रतियोगिता की तैयारी पर चर्चा होती थी और फोटो प्रतियोगिता में प्रतिभाग हेतु चाहे सदस्यता शुल्क हो या प्रतियोगिता शुल्क हो व डाक शुल्क इसका दायित्व बलबीर भाई का होता था, हम सभी को समय से अपनी-अपनी फोटो उन्हें सौंपनी होती थी। भारतीय स्टेट बैंक नैनीताल में भी बलवीर भाई के सौजन्य से चाय का यह सिल सिला जारी रहता था। स्टेट बैंक का कोई भी कार्य हो बलवीर भाई के पास बैठ बैठे हो जाता था। स्टेट बैंक के अधिकारी जी , के .सी.भाई तथा और भी बैंक में बलवीर सिंह जी के मित्र साथीयों के साथ बैंक में फोटो प्रतियोगिता, फोटो प्रदर्शनी के सम्बन्ध मे चर्चाएं होती रहती थी। बलवीर भाई अक्सर “कौन बनेगा करोड़पति ” के कई प्रश्नों की जानकारी मुझसे लेते तो गुरु जी भी इस बात का फायदा उठाकर कई लोक विधाओं के प्रश्न लेकर जानकारी प्राप्त करत थे , और गुरु जी अक्सर फोन से भी यह जानकारी प्राप्त करते रहते थे। आज भी वो किसी चलचित्र कि तरह बार बार याद आता हैं, लगता है जैसे कल ही की तो बात है, ऐसी बहुत सी यादें आज भी जिंदा है।
गुरु जी को समय समय पर नैनीताल में अनेक संस्थाओं के द्वारा उनके व्यक्तित्व व कृतित्व तथा फोटो ग्राफी के क्षेत्र में किये गये उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
अपने देहावसान से कुछ दिन पूर्व ही आपने फोन पर बहुत शीघ्र नैनीताल आने कि बात कही थी, किन्तु ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। एक गुरु कि तरह एक परिवार के वरिष्ठ सदस्य कि तरह आप हमेशा हमें समझाते रहते थे। पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल के हर कार्यक्रम पर आप एक सक्रिय सदस्य की तरह लगे रहते थे। आप एक शिक्षक एक छायाकार के साथ साथ एक बहुत ही अच्छे इंसान थे। गुरु जी आप हमेशा हमारी यादों में हमेशा जिन्दा रहेंगे।
आज आपकी दूसरी पुण्यतिथि पर हम सभी नैनीताल शहर के समस्त छायाकार,रंगकर्मी,
संस्कृति कर्मी,साहित्यकार,
शहरवासी, उपस्थित सभी लोग बहुत ही भारी मन से आपको अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आपको सादर नमन करते हैं।
इस अवसर पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल की संरक्षक कमला जोशी सचिव मनोज कुमार जोशी, अध्यक्ष अनुभा जोशी, प्रशान्त कपिल,
मीनू कपिल, गीता कपिल, निशांत कपिल, श्रीपर्णा जोशी, साबी कपिल आदि उपस्थित थे।












