शोध की गुणवत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सही पद्धति जरूरी: प्रो. भूपिंदर

नैनीताल। गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय शोध के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तथ्यों का निष्पक्ष विश्लेषण और उपयुक्त शोध पद्धति का चयन बेहद जरूरी है। शोध की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि शोधार्थी विषय के अनुरूप पद्धति और शोध उपकरणों का इस्तेमाल किस तरह करता है। यह बात जेएनयू के सेवानिवृत्त प्रो. भूपिंदर ने कुमाऊं विवि में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कही।
मुख्य वक्ता प्रो. भूपिंदर ने शोध के विभिन्न उपकरणों और पद्धतियों की जानकारी देते हुए कहा कि शोध केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राप्त तथ्यों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण कर विश्वसनीय निष्कर्ष तक पहुंचना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने शोधार्थियों को विषय की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त पद्धति अपनाने और शोध प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सावधानी बरतने की सलाह दी। उद्घाटन सत्र में प्रो. ललित तिवारी ने शोध में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति जोशी ने कार्यशाला के उद्देश्यों और शोधार्थियों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। आयोजक प्रो. दीपक पालीवाल ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. सरोज पालीवाल ने अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रियंका रुवाली ने किया। यहां वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, डॉ. दीपक मेलकानी, प्रो. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. ममता लोहुमी आदि रहे।
प्रतिचयन की विधियों पर दिया व्याख्यान
कार्यशाला के दूसरे सत्र में मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के उपनिदेशक डॉ. संजय ने प्रतिचयन की प्रक्रिया पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रतिचयन की विभिन्न विधियों, शोध के लिए उपयुक्त नमूने के चयन और इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शोध में सही नमूने का चयन महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्राप्त आंकड़ों की गुणवत्ता और निष्कर्षों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
देश-विदेश से पहुंचे शोधार्थी
दस दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों और प्रतिष्ठित संस्थानों से आए शोधार्थी एवं प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें मुंबई, आईआईटी खड़गपुर तथा बिहार, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागी शामिल हैं। कार्यशाला के दौरान शोध पद्धतियों, शोध उपकरणों, नमूना चयन और आंकड़ों के विश्लेषण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान होंगे। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक, व्यवस्थित और प्रमाण आधारित शोध के लिए तैयार करना है, ताकि वे अपने अध्ययन को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और उपयोगी बना सकें।












