कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट होंगे विश्वविद्यालय के नए कुलपति, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के वर्तमान कुलपति को मिली कुमाऊं विश्वविद्यालय की कमान; पूर्व छात्र से कुलपति तक का गौरवपूर्ण अकादमिक सफर

नैनीताल, । सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के वर्तमान कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। प्रो. बिष्ट की नियुक्ति इसलिए भी विशेष महत्व रखती है कि वे कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं और इसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष सहित अनेक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन भी कर चुके हैं। इस प्रकार एक विद्यार्थी के रूप में कुमाऊं विश्वविद्यालय से शुरू हुआ उनका अकादमिक सफर अब विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में नई जिम्मेदारी तक पहुंचा है।
विज्ञान, शोध, उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले प्रो. बिष्ट का अकादमिक एवं शोध योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनके नाम 183 शोध-पत्र, 37 पुस्तक अध्याय, 4 पुस्तकें एवं मोनोग्राफ, 61 एनसीबीआई जेनबैंक/एसआरए प्रविष्टियां तथा 9 वित्तपोषित शोध परियोजनाएं दर्ज हैं। उन्होंने 23 शोधार्थियों को पीएच.डी. का सफल मार्गदर्शन प्रदान किया है तथा अनेक पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ताओं एवं शोध फेलोज का मार्गदर्शन किया है। मृदा विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, पर्यावरण एवं जैव-विज्ञान के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान प्रो. बिष्ट ने डीन, जैव-चिकित्सा विज्ञान संकाय; निदेशक, आईक्यूएसी; परीक्षा नियंत्रक; रूसा के नोडल अधिकारी; एनआईआरएफ समन्वयक; प्रवेश, प्लेसमेंट एवं काउंसलिंग प्रभारी सहित अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। विश्वविद्यालय की विभिन्न अकादमिक समितियों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त वे बरहामपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा तथा मिजोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय, आइजोल में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं।
प्रो. बिष्ट की वैज्ञानिक उपलब्धियों को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें भारत गौरव पुरस्कार-2026, राष्ट्र गौरव पुरस्कार-2011, उत्तराखंड रत्न पुरस्कार-2018 तथा इंडो-एशियन विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार-2021 से सम्मानित किया जा चुका है। वे नीदरलैंड स्थित सॉयल साइंस अलर्ट द्वारा विश्व स्तर पर चयनित उद्धृत वैज्ञानिकों में शामिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे नेचर पब्लिशिंग ग्रुप, इंग्लैंड के रीडर पैनलिस्ट तथा ईरान नेशनल साइंस फाउंडेशन की मूल्यांकन इकाई के रेफरी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय कैडेट कोर के क्षेत्र में भी प्रो. बिष्ट की विशिष्ट भूमिका रही है। वर्ष 2026 में उन्हें भारत सरकार द्वारा एनसीसी में मानद कर्नल पद एवं कर्नल कमांडेंट का सम्मान प्रदान किया गया। विज्ञान, शोध, उच्च शिक्षा, प्रशासन और युवा विकास के क्षेत्रों में उनका बहुआयामी अनुभव उनके अकादमिक नेतृत्व को विशिष्ट बनाता है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और पूर्व शिक्षक रहे प्रो. बिष्ट की कुलपति के रूप में नियुक्ति विश्वविद्यालय के लिए भावनात्मक और अकादमिक—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिस विश्वविद्यालय से उन्होंने विद्यार्थी के रूप में अपनी शैक्षणिक यात्रा प्रारंभ की, उसी विश्वविद्यालय का नेतृत्व करने का अवसर उनके लिए भी एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उनका विश्वविद्यालय से दीर्घकालिक जुड़ाव उन्हें यहां की अकादमिक परंपराओं, संस्थागत संस्कृति, उपलब्धियों और चुनौतियों की गहरी समझ प्रदान करता है।
कुलपति के रूप में प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट से शोध एवं नवाचार को नई गति देने, अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करने, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को विस्तार देने तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता के नए आयामों तक पहुंचाने की अपेक्षा की जा रही है। उनके व्यापक शोध अनुभव, प्रशासनिक दक्षता और कुमाऊं विश्वविद्यालय से लंबे अकादमिक संबंध को देखते हुए उनकी नियुक्ति को विश्वविद्यालय के आगामी विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व छात्र से प्रोफेसर, प्रोफेसर से प्रशासक और अब उसी विश्वविद्यालय के कुलपति तक प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट की यात्रा कुमाऊं विश्वविद्यालय की अकादमिक विरासत और उससे जुड़े विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।