श्री मां नयना देवी मंदिर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा तीसरे दिन भी जारी रही
नैनीताल ।श्री मां नयना देवी मंदिर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा मे तृतीय दिवस व्यास श्री चंद्रशेखर अधिकारी जी ने बताया कि जब राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डस लिया और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई, तब उनके शूरवीर पुत्र जनमेजय ने हस्तिनापुर का सिंहासन संभाला। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए राजा जनमेजय ने विश्व का सबसे भयंकर ‘सर्पमेध यज्ञ’ शुरू किया। इस यज्ञ के मंत्रों की शक्ति से संसार के समस्त सर्प खिंचे चले आए और यज्ञ कुंड की अग्नि में भस्म होने लगे।
अहंकार और प्रतिशोध पर क्षमा की विजय
कथा को आगे बढ़ाते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि जब तक्षक नाग के प्राण संकट में पड़े, तब आस्तिक मुनि ने बीच-बचाव किया और राजा जनमेजय को क्रोध और प्रतिशोध की अग्नि को शांत करने की सीख दी। जनमेजय ने मुनि के वचनों का मान रखते हुए यज्ञ को समाप्त किया। व्यास जी ने समझाया कि भागवत महापुराण हमें सिखाती है कि प्रतिशोध से केवल विनाश होता है, जबकि क्षमा और धर्म का मार्ग ही मनुष्य को परम शांति प्रदान करता है।खुशनुमा मौसम होने से भक्तों की अत्यधिक भीड़ ने कथा का श्रवण किया उसके पश्चात चने का प्रसाद वितरित किया आज मुख्य यजमान श्री मनोज चौधरी ,महेश भट्ट सपत्नीक बैठे। आयोजन को सफल बनाने में ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राजीव लोचन साह सचिव श्री प्रदीप कुमार शाह उपाध्यक्ष श्री घनश्याम लाल साह कोषाध्यक्ष श्री किशन सिंह नेगी प्रधान आचार्य श्री बसन्त बल्लभ पाण्डेय श्री चंद्रशेखर तिवारी भुवन कांडपाल गणेश बहुगुणा नवीन चंद्र तिवारी प्रशासनिक अधिकारी सुरेश मेलकानी बसन्त जोशी बृज मोहन जोशी राजीव दुबे श्याम यादव अमिता साह सुमन साह मंजू रौतेला मीनू बुधलाकोटी मुन्नी भट्ट जुटे रहे ।











