प्रदर्शन कला के मर्मज्ञबहुआयामी व्यक्तित्व -रमेश चंद्र जोशी जी की३१ वीं पुण्यतिथि पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल ने किया याद ।बृजमोहन जोशी नैनीताल।दिनांक ०९ जून २०२६


नैनीताल। प्रदर्शन कला के मर्मज्ञ बहु आयामी व्यक्तित्व रमेश चंद्र जोशी (गुरु जी) की ३१ वीं पुण्यतिथि पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल द्वारा उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल के निदेशक बृजमोहन जोशी ने रमेश चंद्र जोशी जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बतलाया कि पण्डित मोतीराम जोशी श्रीमती पार्वती जोशी जी के घर रमेश चंद्र जोशी जी का जन्म वर्ष १९४२ मे सेलाखोला‌ अल्मोड़ा में हुआ।
लक्ष्मण व राम के अभिनय के साथ आपने राम लीलाओं से अपने कला जीवन का श्री गणेश किया। वर्ष १९६९ से १९९२ तक आपने लोक संस्कृति के विविध पहलुओं को जीवन्ता प्रदान की।‌ और मेरा यह मानना है कि (गुरु जी) रमेश चंद्र जोशी जी का महत्व इसलिए भी है कि उन्होंने अपने जीवन पर्यन्त अनेक विभागों अनेक संस्थाओं जैसे- बाल कन जी बाड़ी, लोक कलाकार संघ,जन कला केन्द्र, चेतना प्रयास संस्था, हिमानी आर्ट व आयाम मंच नैनीताल आदि के माध्यम से सैकड़ों युवा कलाकारों को लोक संस्कृति के विराट पक्षों की जानकारी दी चाहे वह बैठकी होली हो, रामलीला हो,गीत एवं नाटक प्रभाग नैनीताल केन्द्र हो या विरला विद्या मंदिर नैनीताल ।कुमाऊंनी लोक धुनों के साथ साथ आप शास्त्रीय संगीत पर भी असाधारण प्रतिभा रखते थे आपका संगीत पक्ष (गायन) के साथ साथ आपका भाव पक्ष भी अद्वितीय था। उनका संगीत आपको उनके साथ जोड़ने वाला होता था।आप अच्छे अच्छे नर्तकों को भी प्रभावित करने की विलक्षण प्रतिभा रखते थे।मेरा मानना है किआप एक पंच मेल कलाकार थे।
संगीत‌की प्रारम्भिक शिक्षा आपको अपने पिता पं. मोती राम जोशी (मोत्तदा) जी से प्राप्त हुई।मोती राम जोशी जी एक कुशल मंजीरा वादक व संगीतज्ञ थे।आप आकाशवाणी के बी.हाई. ग्रेड कलाकार थे तथा H. M .V – हिज मास्टर वाइस ग्रामोफोन कम्पनी के द्वारा आपके द्वारा गाये गये लोक गीत पर उत्तराखंड सरकार के द्वारा रिकार्ड निकाला गया।
वर्ष २००६ में मेरे द्वारा व्यक्तिगत रूप से गुरु जी रमेश चंद्र जोशी जी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर किये गये (कार्य) साक्षात्कारों के आधार पर उन स्मृतियों को सांझा कर रहा हूं –
अल्मोड़ा से संगीता चार्य पं.चन्द शेखर तिवाड़ी जी ने बतलाया कि – रमेश को सुना,आवाज व सुरों का धनी था। बड़ा ही सधा व मधुर कंठ था।मेरे पास संगीत सिखने आता था।संगीताचार्य शिव चरण पाण्डे जी ने कहा कि – रमेश से बाल्यकाल से ही मेरा परिचय रहा। होली गायन में तो वो सिद्ध हस्त थे ही रामलीलाओं से भी उनका खूब लगाव रहा,जब भी वो गाते थे तन्मय होकर गाते थे। संगीतज्ञ व वरिष्ठ होल्यार दिनेश चंद्र‌ जोशी(कन्नू उस्ताद) ने बतलाया कि – अल्मोड़ा में जहां जहां होली की बैठकें होती थी तो मेरे साथ रमेश ही संगत/ तबला वादन करते थे। विश्वभर नाथ साह, वाचस्पति डयूणी,
जगमोहन बिष्ट,रीता बिष्ट,प्रेमा साह,के.के.साह, के.पी.साह, सन्तोष साह, हेम पाण्डे,राजा साह, सुरेश कुमार,अनिल घिल्डियाल, महेश चंद्र जोशी, शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़ ‘, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा ‘,प्रमोद प्रसाद साह आदि ने भी उनके कृतित्व पर अपने अपने विचार व्यक्त किये हैं।
मुझे आज भी याद है कि नैनीताल में जाड़ों के दिनों में तो गुरु जी के घर में चालीस (४०) दिनों का चिल्ला होता था अर्थात चालीस दिनों तक उनके घर में केवल संगीत गायन वादन के अलावा और कोई कार्य नहीं होता था। मैं लगभग ३०-३२ वर्षों तक गुरु जी के साथ उनके परिवार के सदस्य के रूप में उनके साथ रहा और कला के सन्दर्भ में आज मेरा जो भी परिचय है वह गुरु जी का ही आशीर्वाद है। गुरु जी की सबसे बड़ी खुबी यह थी कि वो जब भी किसी कार्य हो अपने हाथ में ले लेते थे तो उसमें पूरी तरह जुट जाते थे चाहे वह उनका व्यक्तिगत कार्य हो या कोई अन्य कार्य। गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ ने एक साक्षात्कार में कहा कि- बदन उनका कुछ भारी हो गया था किन्तु वह तरूणियों के साथ नृत्य करते थे उनकी टक्कर का नृत्य करते थे।गीत एवं नाटक प्रभाग नैनीताल केन्द्र में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा।
गुरु जी हमेशा कार्य करने में तल्लीन रहते थे उनका अनुशासन बहुत ही कठोर होता था। वो खुद भी अत्यधिक मेहनत करते थे और हम से भी उतनी ही मेहनत करवाते थे। प्रदर्शन कलाओं का यह मर्मज्ञ दिनांक ०९जून १९९५ को इस संसार से हमेशा के लिएअनन्त में विलीन हो गया पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल परिवार द्वारा गुरू जी की ३१ वीं पुण्यतिथि पर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।
इस अवसर पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा परिवार की अध्यक्ष कमला जोशी, सचिव मनोज जोशी,अनुभा जोशी, श्रीपर्णा जोशी, प्रशान्त कपिल, निशांत कपिल,मीनु कपिल,
साबी कपिल,त्वरिता कपिल,
आदि उपस्थित थे।