कुमाऊँ विश्वविद्यालय के वनस्पतिशास्त्री ने कंज़र्वेशन एशिया कांग्रेस 2026 में किया भारत का प्रतिनिधित्व

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के वनस्पतिशास्त्री एवं शोधकर्ता डॉ. हर्ष कुमार चौहान ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में 3 से 5 जून 2026 तक आयोजित प्रतिष्ठित कंज़र्वेशन एशिया कांग्रेस (CAC) नेपाल 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को ट्रैफिक इंटरनेशनल, कैम्ब्रिज द्वारा प्रायोजित किया गया। ट्रैफिक इंटरनेशनल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) एवं आईयूसीएन (IUCN) के सहयोग से अवैध वन्यजीव व्यापार पर नियंत्रण तथा जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने वाली विश्व की अग्रणी संरक्षण संस्थाओं में से एक है।
काठमांडू में आयोजित इस सम्मेलन में संरक्षण वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों के नेताओं, संरक्षण विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, कलाकारों, विद्यार्थियों, पत्रकारों तथा संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने एशिया भर में संचालित सफल संरक्षण पहलों, अनुसंधान निष्कर्षों, अनुभवों और व्यावहारिक उपकरणों का आदान-प्रदान किया।
सीएसी नेपाल 2026 में छह महाद्वीपों के 42 देशों से लगभग 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिससे यह एशिया क्षेत्र के सबसे बड़े संरक्षण सम्मेलनों में से एक बन गया। सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में चार प्लेनरी सेशन्स, 300 मौखिक प्रस्तुतियाँ, 59 पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा 12 कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
सम्मेलन के दौरान डॉ. चौहान ने “स्केलिंग आउट एंड अप: प्रोग्रेस टुवर्ड्स सस्टेनेबल ट्रेड एंड कंज़र्वेशन ऑफ प्लांट्स एंड फंगी” विषयक संगोष्ठी में आमंत्रित वक्ता के रूप में व्याख्यान प्रस्तुत किया। उनका व्याख्यान “प्रोग्रेस एंड प्रायोरिटीज फॉर द आईयूसीएन रेड लिस्ट असेसमेंट ऑफ हिमालयन मेडिसिनल प्लांट्स” शीर्षक पर आधारित था, जिसमें उन्होंने हिमालयी औषधीय पौधों के संरक्षण मूल्यांकन की वर्तमान प्रगति, प्रमुख चुनौतियों तथा भविष्य की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला।
यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण मंच भी सिद्ध हुआ। डॉ. चौहान ने ट्रैफिक इंटरनेशनल की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ब्रायोनी मॉर्गन एवं जेम्स स्टीवंस, तथा यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन (डेनमार्क) के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. कार्स्टन स्मिथ-हॉल के साथ विस्तृत चर्चा की। इन चर्चाओं का केंद्र सतत व्यापार, बाजार-प्रेरक कारक, सीमा-पार संरक्षण चुनौतियाँ तथा औषधीय पौधों एवं अन्य वन्यजीव प्रजातियों के आईयूसीएन रेड लिस्ट असेसमेंट पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करना रहा।
डॉ. चौहान के अनुसार ट्रैफिक इंटरनेशनल, एएनएसएबी, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, त्रिभुवन विश्वविद्यालय तथा चीन के संरक्षण सहयोगियों के साथ हुई चर्चाओं ने हिमालयी जैव संसाधनों के संरक्षण एवं सतत उपयोग के लिए एक संभावित अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम की नींव रखी है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक इंटरनेशनल वर्तमान में हिमालयी क्षेत्र में संरक्षण परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा रहा है तथा भविष्य की सहयोगात्मक परियोजनाओं में कुमाऊँ विश्वविद्यालय को शामिल करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।
कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने डॉ. चौहान की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहभागिता कुमाऊँ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करती है तथा भारतीय हिमालय में किए जा रहे वैज्ञानिक अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा प्रदान करती है।












