चाय का लुत्फ या लत” विषय पर गोष्ठी संपन्न चाय का सीमित मात्रा में उपयोग ऊर्जा देता है-प्रो. करुणा चांदना

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “चाय का लुत्फ या लत” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल से 660 वाँ वेबिनार था। मुख्य वक्ता प्रो. करुणा चांदना ने कहा है लत कई तरह की होती है जैसे धूम्रपान,शराब पीना,नशीली वस्तुओं का सेवन,जुआ खेलना सट्टेबाजी तथा ड्रग्स का प्रयोग करना,लेकिन आमतौर पर चाय की लत बहुत प्रचलित है,एक शोध में बताया गया कि सदियों से चाय सबका प्रिय पेय रहा है। आमतौर पर भारतीय लोगों की सुबह की शुरुआत चाय से ही होती है अभी बेड पर ही होते हैं की चाय की चुस्कियां ले लेकर चाय का लुत्फ उठाते हैं।चाय सभी वर्गों के लोग बड़े चटकारे भरकर पीते हैं यही कारण है की गांव,शहर,नुक्कड़,फुटपाथ, खो-खो,ढाबों आदि सब जगह चाय आसानी से मिल जाती है आजकल तो मॉल में भी चौयास के नाम से चाय मिलती है।अगर आपको किसी की आव भगत करनी है तो उसे चाय पर निमंत्रण देकर बुलाने से अच्छा अवसर और कोई नहीं हो सकता।
परंतु पतंजलि एवं आयुर्वेद के अनुसार चाय की पत्तियों को औषधीय के रूप में प्रयोग किया जाता है,चाय चाहे हरी हो या काली हो वह स्वास्थ्य लाभ दे सकती है,अगर इसका सेवन संयम,संतुलन से सही समय पर सही मात्रा में काड़े के रूप में औषधि के रूप में प्रयोग किया जाए।ब्लैक टी वायु दोष खत्म करती है उत्तेजक और ऊर्जा वर्धक मानी जाती है।सर दर्द, आंखें आने पर में राहत देती है नजला जुकाम होने पर अगर चाय के काड़े में बनक्षा,मुलैठी डालकर प्रयोग की जाए तो बहुत लाभ मिलता है।ब्लैक टी पेट,हृदय एवं मस्तिष्क को स्वस्थ रखने का काम भी करती है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं इसके साथ यूरिन संबंधी समस्याओं को जलने पर लाभकारी और बालों के लिए टॉनिक के रूप में भी जानी जाती है।मधुमेह को कंट्रोल करती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें फ्लेवोनॉयड्स होते हैं और हरी चाय भी पित्त और कफ दोष को संतुलित करती है यह भी ब्लैक टी की तरह पाचन में हृदय, एवं मस्तिष्क को स्वस्थ रखती है। वेट लॉस के लिए भी बहुत कारगर है।अगर आप दूधिया चाय की लत के शिकार हैं एवं अत्यंत मात्रा में इसका प्रयोग करते हैं तो चाय के बहुत हानिकारक प्रभाव शरीर में देखे जा सकते हैं जैसे अनिद्रा खाली पेट लेने से एसिडिटी,बर्निंग,आयरन की कमी होना, लीवर का खराब होना चिड़चिड़ापन, दांतों का काला होना,भूख खत्म होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
अतः अंत में आयुर्वेद का संदेश है की अगर आप चाय का सेवन सही समय पर सही मात्रा मे ओषधि के रूप में 10 -15 मिलीं मीटर लेते हैं तो यह आपकी जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है तब आप इसके होने वाले फायदाओं का भरपूर लाभ उठा सकते हैं और हानिकारक प्रभावों से बच सकते हैं। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री राजश्री यादव व अध्यक्ष सुधीर बंसल ने भी हानि लाभ दोनों पक्षों की चर्चा की।परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन करते हुए चाय को मिलने मिलाने का खुशी और ग़म साँझा करने का माध्यम बताया।राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायक वीरेंद्र आहूजा, रविन्द्र गुप्ता, प्रवीना ठक्कर, कौशल्या अरोड़ा, कमला हँस, उषा सूद, कुसुम भंडारी आदि के मधुर भजन हुए।

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