एरीज को देश दुनिया में पहचान दिलाने वाले डा वहाब रिटायर्ड

नैनीताल। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) पूर्व कार्यवाहक निदेशक डा वहाबुद्दीन के सेवानिवृत्त हो गए हैं। एरीज को देश दुनिया में पहचान दिलाने में डा वहाब को सदा याद किया जाता रहेगा। उनके सराहीय कार्य को लेकर सदा उन्हे याद किया जाता रहेगा। डा वहाबुद्दीन ने 1984 में शोध छात्र के रूप में पदार्पण हुआ और 1989 में सौर विज्ञानी के पद से अपनी सेवा देनी शुरू की। अपने 34 वर्ष के कार्यकाल में दो बार कार्यवाहक निदेशक के पद पर नियुक्त हुए। इस दौरान देवस्थल स्थित एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर ऑप्टिकल दूरबीन की स्थापना हुई, जबकि 4 मीटर लिक्विड मिरर दूरबीन के 100 सेमी दूरबीन का निर्माण कार्य संपन्न हो सका। एरीज के कठिन समय के दौरान निर्भीक व कर्मठता के साथ अपनी सेवा दी। जिसके परिणामस्वरूप एरीज एक मुकाम तक पहुंच पाया। एरीज मनोरापीक में सोलर टॉवर टेलेस्कोप की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एसटी रडार जैसी बड़ी सुविधा उनके कार्यवाहक निदेशक के दौरान जुटाई गई। डा वहाबउद्दीन ने दुनिया के लगभग डेढ़ दर्जन देशों में जाकर सूर्य पर अध्ययन किए। उनके अंडर के कई छात्रों ने पीएचडी की। विज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर के अध्ययन किए। 2003 में उनके द्वारा ऐतिहासिक सोलर फ्लेयर का औबजरवेशन किया । सूर्य की प्रत्येक गतिविधि पर निगाह रखकर सूर्य से आने वाले हर खतरे से दुनिया को अगाह किया। एरीज सभागार में उनके विदाई समारोह के दौरान वरिष्ठ विज्ञानी डा बृजेश कुमार, डा नरेंद्र सिंह, डा संतोष जोशी, डा योगेश जोशी, डा मनीष नाजा, डा वीरेंद्र यादव, डा प्रदीप चक्रवर्ती, डा भरत सिंह, डा कुंतल मिश्रा, डा तरुण बांगिया, डा सौरभ जोशी, हरीश तिवारी, राविंद्र यादव समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

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