कुलपति प्रो० दीवान एस रावत की पहल पर उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिये दोनों संस्थान मिलकर करेंगे कार्य

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कुविवि और आईआईटी रूड़की के मध्य अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यों में परस्पर साझेदारी एवं सहयोग हेतु हुआ समझौता ज्ञापन

नैनीताल l कुमाऊं विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के मध्य अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यों में परस्पर साझेदारी एवं सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन हुआ है। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के कुलपति प्रो० दीवान एस रावत और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के निदेशक प्रो० कमल किशोर पंत की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किये गये हैं। समझौता ज्ञापन के प्राथमिक उद्देश्यों में शैक्षणिक परियोजनाओं, अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीकी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। एमओयू में पारस्परिक सहमति के अनुसार सामान्य हित के कार्यक्रमों में आवश्यक प्रयोगशाला संसाधनों और वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग/आदान-प्रदान, कुमाऊं विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास, अतिथि व्याख्यानों के आदान-प्रदान, शोध के तकनीकी सहयोग, प्राकृतिक उत्पादों की जैविक गतिविधियों (जैसे एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, और एंटीऑक्सीडेंट आदि) के लिए स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि क्षेत्रों के लिए जैविक मचानों की 3-डी प्रिंटिंग, बाजरा जैसी जलवायु लचीली फसलों का मूल्यांकन, उत्तराखंड के लौह खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य गुण, पशु संघर्ष, स्थानीय सामुदायिक स्तर पर जंगल की आग को मैन्युअल रूप से बुझाने के लिए हाथ उपकरणों का डिज़ाइन, विस्फोट, भूस्खलन, बर्फ की चादर और सिकुड़ते ग्लेशियर से जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए उपकरणों/प्रभावी रणनीतियों का डिज़ाइन, कला, शिल्प, हथकरघा के संदर्भ में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेज़ीकरण और उनकी वैश्विक पहुंच के लिए एक सक्षम वातावरण प्रदान करने पर जोर दिया गया है। इसी के साथ दोनों संस्थान संयुक्त प्रकाशनों पर सहयोग और राष्ट्र के विकास के लिए संयुक्त परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के साथ हुए एमओयू पर कुलपति प्रो० दीवान एस रावत ने बताया कि इस ऐतिहासिक साझेदारी का उद्देश्य उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिये हरित प्रौद्योगिकियों, बागवानी, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, भौगोलिक परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं का गहन अध्ययन, सर्वेक्षण और उन्नत अनुसंधान को भी बढ़ावा देना है, तथा तदनुरूप नीतियों का निर्धारण एवं कार्यक्रमों का संचालन किया जाना है। इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की से डीन स्पॉन्सर्ड रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी प्रो० अक्षय द्विवेदी, डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो० नवीन के० नवानी, एसोसिएट डीन कॉरपोरेट इंटरेक्शन प्रो० साई रामुडु मेका, एसोसिएट डीन ऑफ इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन प्रो० विवेक के० मलिक उपस्थित रहे।

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