माओवादी गतिविधियों में आरोपित खीम सिंह व भास्कर पाण्डे बरी-एडीजे कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया

नैनीताल l द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की कोर्ट ने आठ साल पहले नैनीताल जिले की धारी तहसील परिसर में सरकारी जिप्सी को आग लगाने व प्रतिबंधित माओवादी संगठन के पोस्टर व स्लोगन लगाने के मामले में आरोपित खीम सिंह बोरा उर्फ मैत्रेय उर्फ प्रकाश उर्फ राजन, उर्फ विजय पहरू प्रभाकर पुत्र पूरन सिंह बोरा निवासी ग्राम पल्यूड़, पोस्ट सोमेश्वर जिला अल्मोड़ा तथा भास्कर पाण्डे उर्फ भुवन पुत्र खीमानंद पाण्डे निवासी ग्राम अगरतोला, तहसील भनोली, जिला अल्मोड़ा को आरोपित अपराधों में साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त करार दिया है। दोनों कथित माओवादियों के दोषमुक्त करार होने के बाद पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अभियोजन के अनुसार पहली फरवरी 2017 की रात करीब नौ बजे से रात 2.35 बजे के बीच धारी तहसील परिसर में सरकारी वाहन को आग लगाकर जला दिया गया। साथ ही तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी संगठन के पोस्टर व श्लोगन लगाए गए थे। इस घटना से पूरे राज्य के पुलिस महकमे में खलबली मच गई और इसे माओवाद की गहरी होती जड़ों के तौर पर लिया गया। इस मामले में पुलिस जांच में माओवादी संगठन के सदस्य खीम सिंह बोरा व भास्कर पाण्डे की संलिप्तता उजागर हुई। इस मामले में पुलिस ने 17 जुलाई 2019 को आरोपित खीम सिंह बोरा को प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ बरेली से गिरफ्तार किया जबकि भास्कर को अज्ञात स्थान से गिरफ्तार किया गया था। बोरा के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के लखनऊ के आतंकवादी निरोधी थाने में धारा 20/38 विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967 एवं धारा-3/25 आयुध अधिनियम-1959 के तहत मुकदमा दर्ज किया। 21 नवंबर 2022 को बोरा व भास्कर पाण्डे उर्फ भुवन के विरुद्ध धारा-436, सपठित धारा-34 आइपीसी, धारा-3( 1) लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, धारा 10/20 विधि विरूद्ध कियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 एवं धारा 127 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत आरोप तय किए गए।

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अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए 19 गवाहों तथा दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। अभियोजन के साथ ही बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुभाष जोशी की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि खमी सिंह बोरा की संलिप्तता के बारे में अभिलेख में किसी प्रकार का विश्वसनीय मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद नहीं है। बरेली से गिरफ्तारी के दौरान आरोपित बोरा के कब्जे से प्रतिबंधित सामान प्राप्त होने का अभियोग है, लेकिन पहली फरवरी 2017 की रात्रि तक धारी क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों के संबंध में आरोपित बोरा के विरुद्ध किसी प्रकार का साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
घटनास्थल से नहीं मिला माओवादी साहित्य

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नैनीताल: इस मामले में तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी की ओर से बताया गया कि आठ अक्टूबर 2021 को आरोपित भास्कर पाण्डे को जिला कारागार अल्मोड़ा से माओवादी साहित्य की तलाशी के लिए लाया गया, फोर्स के साथ पाण्डे के बताए स्थानों पर तलाशी ली गई लेकिन साहित्य बरामद नहीं हुआ। तहसील धारी पुरिसर पुरानी व नई के आवा मुख्य ब्लाक कार्याल, ब्लाक परिसर, पुराने व देशी मदिरा की दुकान में की गई घटना व लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन के बारे में तस्दीक किया गया। दो दिन बरामदगी के प्रयास के बाद भी माओवादी साहित्य बरामद नहीं हुआ। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद पाया कि भास्कर पाण्डे के विरूद्ध इस गुणवत्ता का साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा सके। जिसके बाद कोर्ट ने
आरोपित खीम सिंह बोरा व भास्कर पाण्डे को धारा 436 सपठित धारा 34 आइपीसी, 1860, धारा 3(1) लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984, धारा 10/20 विधि विरूद्ध कियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 एवं धारा 127 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अपराध से दोषमुक्त करार दिया।

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