पुनीत टंडन का माँ नंदा-सुनंदा का पारंपरिक रास्ते से डोला निकालने के संबंध में पत्र

नैनीताल: माँ नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने माँ नंदा-सुनंदा का पारंपरिक रास्ते (लोअर मॉल रोड) से डोला निकालने के संबंध में पत्र लिखकर नगरवासियों की भावनाओं से अवगत कराया है। पत्र में अधिकारियों से चर्चा का विवरण प्रस्तुत कर बताया है कि सभी मीडिया मित्रों को इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सूचित किया जाता है कि राजेश पंत (लोनिवि चीफ) से धरने की मुख्य शर्त 15 अगस्त से 19 अगस्त तक नैनीताल में दिए गए हमारे धरने की एक प्रमुख शर्त यह थी कि माँ का डोला अपने पारंपरिक रास्ते से ही निकलेगा तथा शहर की धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा।
वार्ता में उन्होंने रैंप हटाने के निर्देश देने की बात कही थी, वहीं शाम की वार्ता में यह स्पष्ट किया कि लोक निर्माण विभाग की तरफ से डोला निकालने के लिए पूरी तैयारी है दिन-रात मेहनत करके सड़क की लेवलिंग पूरी कर दी गई है, और उनकी की तरफ से पूरी तरह ग्रीन सिग्नल है कि सीमित लोगों (लगभग 35-40 लोग) के साथ डोला पारंपरिक रास्ते से सुरक्षित निकाला जा सकता है। बताया कि
इस मामले में अब ट्विस्ट यह है कि प्रशासन और मेला अधिकारियों की तरफ से इससे बचने की कोशिश की जा रही है और मना किया जा रहा है।
रामसेवक सभा का पक्ष: मुख्य निकाय (रामसेवक सभा) का यह कहना है कि यदि डोला ऊपर से भी चला जाए, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । कानून-व्यवस्था का तर्क देते हुए प्रशासन और मेला अधिकारियों का कहना है कि अभी दुर्गा पूजा का समय नजदीक है तथा पुलिस एवं कानून-व्यवस्था की व्यवस्था भी संभालनी है, इसलिए फिलहाल इसे टाल दिया जाय। बताया कि राजेश पंत की स्पष्ट संपुष्टि और आश्वासन है कि पारंपरिक रूट से डोला निकाला जा सकता है। यदि प्रशासन द्वारा इसके विपरीत कोई भ्रामक बयान दिलवाया जाता है या तैयारी न होने की बात कही जाती है, तो यह सरासर एक षड्यंत्र, झूठ और रणनीतिक चाल होगी।
उन्होंने कहा है कि नैनीताल वासियों की आस्था और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, यदि प्रशासन या अन्य पक्ष इसमें बाधा डालते हैं, तो आगे माँ के प्रकोप की ज़िम्मेदारी जिनकी इस फैसले में भागीदारी है उनकी होगी। पारंपरिक रास्ता नहीं बदलना चाहिए यह सही नहीं होगा बस इतनी चेतावनी में सभी को जरूर देना चाहूँगा। मैया सबकी रक्षा करे ऐसी मेरी इस पावन पर्व में प्रार्थना है।

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