भारतीय ज्ञान प्रणाली पर छह दिवसीय बेसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल स्थित मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित छह दिवसीय बेसिक ट्रेनिंग प्रोग्राम का आज विधिवत शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के आईकेएस प्रभाग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा पंजाब से आए कुल 100 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली की मूल अवधारणाओं, उसके अकादमिक महत्व तथा उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में उसके व्यावहारिक एकीकरण से परिचित कराना है।
डॉ. रुचिका सिंह, समन्वयक (आईकेएस प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से संकाय सदस्यों को IKS आधारित पाठ्यवस्तु, शिक्षण विधियों एवं मूल्यांकन पद्धतियों की स्पष्ट समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण सत्रों के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों, पाठ्यक्रम संरचना, शिक्षण–अधिगम मॉडल, तथा IKS के समकालीन अनुप्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यूजीसी ने आशा व्यक्त की है कि यह कार्यक्रम देश में भारतीय ज्ञान प्रणाली के सुदृढ़ अकादमिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत उपाध्याय (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली बहु-विषयक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है और यह आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर प्रो. दिव्या यू. जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल परंपरा का अध्ययन नहीं, बल्कि नवाचार, स्थायित्व और स्थानीय ज्ञान को वैश्विक विमर्श से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है।
वहीं प्रो. रीतेश साह ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षण एवं शोध से जोड़कर उच्च शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, समाजोन्मुखी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रो. हरिप्रिया, प्रो. एकता सिंह, प्रो. रीना सिंह, डॉ. युगल जोशी, डॉ. कुबेर गिंती, डॉ. दीपा, डॉ निशु भाटी, डॉ मोहित रौतेला, डॉ दीपक मेलकनी सहित कुमाऊँ विश्वविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य व शोधार्थी उपस्थित रहे।

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