हर तरफ राख है……रूस यूक्रेन युद्ध में महिलाओं के साथ बर्बरता ……रश्मि रंजन की कलम सेलूट रही हूं लूटने का चलन ही मुझे तोड़ता है अब तो हड्डियों का भी देख टूटता अवशेष है।सह सकती हूं मैं ही नेमतें खो रही अस्मिता आँखों में सूखा है पानी, मरूभूमि बस शेष है।।भया वह स्थिति है……

युद्ध हो और बर्बरता नहीं क्या सोच सकते है, नहीं!!खबरों से पता चला कि कई महिलाओं का पहले बलात्कार किया गया और फिर उनको जान से मार दिया गया। कई महिलाएं पुलिस को बता रही हैं कि रूसी सेना द्वारा उनके साथ बदसलूकी की गई, काफी अत्याचार हुआ। बूचा में 25 महिलाओं को जानवर की तरफ एक बेसमेंट में बंद रखा गया था, फिर उनका रेप किया गया।खबरें के माध्यम से पता चला कि कीव से 50 मील दूर इवानकीव में लड़कियां के जबरदस्ती बाल कटवाए गए, ताकि सेना उनके साथ बलात्कार न करें। शहर की डिप्टी मेयर मैरीना बेसचस्ना ने कहा, कि इससे वे कम आकर्षक लगें और वो रेप की शिकार ना हो।देश का जो हश्र होता है सो होता ही है पर इस युद्ध या किसी भी निरंकुश सोच का भुगतान सबसे अधिक महिलाओं को ही क्यों करना पड़ता है?? संयुक्त राष्ट्र महिला एजेंसी का कहना है कि संकटों और संघर्षों में महिलाएं और लड़कियां सबसे अधिक कीमत चुकाती हैं। यहां अफगानिस्तान के हाल फिलहाल के घटना को जोड़ा जाना गलत नहीं होगा। तालिबान के कब्जा सत्ता बदली पर सबसे बड़ी कीमत तो आज वे महिलाएं ही चुका रही हैं। म्यांमार, साहेल और हैती के बाद अब यूक्रेन का भयानक युद्ध क्या नही लगता सब एक जैसा।नतीजतन इस क्रूर अमानवीय संघर्ष का बोझ महिलाओं को उठाना पड़ता है जिसमें क्रूरता, यातना, बलात्कार, हिंसा, शोषण, यौन दासता, वेश्यावृति, जबरन गर्भावस्था, जबरन नसबंदी आदि का शिकार या आज के डिजिटल लैंग्वेज में ट्रोलिंग शारीरिक और मानसिक तौर पर।युद्ध अब शायद और न चले पर छोड़ जाएगा अपना वजूद, रिस्ते हुए ज़ख्मों के रूप में। तिल तिल जलने वाली खामोशी और अवसाद में घिरे हुए दिल दहलाने वाले मार्मिक दृश्य जिन्हें न चाहते हुए भी भूल न पाने की विवशता और शेष रह जाता हैं बस राख…. हर तरफ राख है……..








