डीएसबी परिसर के इतिहास विभाग की ओर से व्याख्यान का आयोजन किया गया

नैनीताल । डीएसबी परिसर के इतिहास विभाग की ओर से भौतिक विज्ञान के सेमिनार हॉल में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें इतिहासकार व कवि प्रो़ ताराचंद्र त्रिपाठी ने छात्रो को व्याख्यान दिया । जिसमें उन्होंने कहा की इतिहास घटनाक्रम नहीं है बल्की इतिहास ट्रेंड है। डीएसबी में आयोजित व्यख्यान में मुख्य अतिथि प्रो़ तारा चंद्र त्रिपाठी रहे, विशिष्ठ अतिथि प्रभात उप्रति, कुविवि के कुलपति प्रो़ डीएस रावत व केएमवीएन के डीके शर्मा रहे, कार्यक्रम का संचालन ऋषभ रावल ने किया। इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो़ सावित्रि कैड़ा जन्तवाल ने सभी अतिथियों का स्वगत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा की प्रो़ त्रिपाठी डीएसबी के ही पूर्व छात्र है, उनकी ओर से हिमालय संग्रहाल को दिया गया सोने का सिक्का संग्रहालय के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मुख्य वक्ता प्रो़ ताराचंद्र त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में कहा की वह वाणिज्य के छात्र थे, लेकिन अपने गुरू अवधबिहारी लाला अवस्थी के साथ जुड़े रहने से उन्हें इतिहास की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि उन्होंने बीए में ही इतिहास के सभी शिलालेखों का अध्ययन कर लिया था। उन्होंने बताया कि उनके गुरू विशंभर नाथ उपाध्याय का ज्ञान अद्भुत था, उन्होंने कहा की इतिहास मानव विकास की यात्रा है। इतिहास कोई घटनाक्रम नहीं है, इतिहास एक ट्रेंड है, जिसकी कोई सीमा नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इतिहास की जानकारी जुटाने के लिए वह जहां भी गए वहां के नक्से बनाए। उन्होंने कहा की संस्कृत कोई मूल भाषा नहीं है, मूल भाषा हमारी बोली है। आजकल पीएचडी एक बीमारी है, जिसे लोग जल्दबाजी में कर रहे है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पुरातन सिक्कों की खोज की व उनकी जानकारी जुटाने में सदा लगे रहे। उन्होंने बताया की जाति और धर्म डर से पैदा हुए। इतिहास को स्वार्थ के लिए वोट दिया जा रहा जो देश के लिए सबसे बड़ी विडंबना है। उन्होंन बताया की उन्होंने 22 लाख रूपए के प्रोजेक्ट से भाषा संरक्षण के लिए तैयार किया। जिसमें मूल भाषा में खेलों आयोजन किया गया जिसमें, प्रथम आने वाले छात्रों के साथ ही छात्रों को प्रतिभाग कराने वाले शिक्षकों को भी दस हजार रूपए का पुस्करा दिया गया। प्राभात उप्रेती ने कहा की जब तक हम इमानदार नहीं होंगे, हम आगे नहीं बढ़ सकें। इतिहास को जानने के लिए हमें अपने अंहकार को त्यागना होगा। कुलपति प्रो़ डीएस रावत ने कहा की जो इतिहास नहीं जानता है वह उस पेड़ की तरह है, जिसकी कोई जड़ नहीं है। आजकल पीएचडी महज एक डिग्री है, जिसे छात्र जल्द से जल्द निपटाना चाहते है। अगर यही हाताल रहे तो भारत कभी विकसित देश नहीं बन सकता है। इस दौरान परिसर निदेशक प्रो़ नीता बोरा शर्मा,प्रो़ सूची बिष्ट, डॉ़ हरदयाल,डॉ़ संजय टम्टा,डॉ़, पीएस अधिकारी,डॉ पूजा जोशी पालीवाल, डॉ ममता जोशी, डॉ दिव्या पांगती, डॉ़ हिमांशु लोहनी आदि मौजूद रहे।