लोक शिल्प विधा पर आधारित डिकर की कार्यशाला।आलेख -बृजमोहन जोशी।

भवाली ( नैनीताल)। जीवन वर्षा कला संगम समिति, मेहरागांव द्वारा आयोजित कुमाऊंनी लोक शिल्प विधा पर आधारित डिकर मिट्टी की देवी देवताओं की मूर्ति निर्माण की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन टी.आर.सी.भवाली मे किया गया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे पदम् श्री डा.यशोधर मठपाल जी। विशिष्ठ अतिथियों में रंगकर्मी, लोक कलाकार, लोक चित्रकार व प्रसिद्ध छायाकार – बृजमोहन जोशी तथा प्रधानाचार्य होली अकादमी स्कूल से मधु विंग, बी.एस.एस.पाल स्कूल सेआशीष पांडे, जी.बी.पन्त इण्टर कालेज से सीमा बरगली जी।डिकार निर्माण कि इस कार्यशाला में उपरोक्त स्कूलों सेआये विद्यार्थियों के साथ साथ मुख्य अतिथि डा. यशोधर मठपाल जी तथा बृजमोहन जोशी के द्वारा भी डिकार मूर्तियों का निर्माण व प्रशिक्षण प्रतिभागियों को दिया गया। अपने आशीर्वचन में डा.यशोधर मठपाल जी ने कहा कि यह देवभूमि शिव पार्वती कि तपोभूमि भी है जहां एक ओर यह क्षेत्र भगवान शिव का ससुराल है तो वहीं दूसरी ओर मां पार्वती का मायका भी है। हरेला प्रकृति को पूजने का पर्व है, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है, भूमि परीक्षण का पर्व है, और इस कलयुग में अन्न के महत्व को समझने का पर्व है , मठपाल जी ने लोक संस्कृति को जीवंतता प्रदान करने के उद्देश्य से किये जा रहे इस प्रयास कि सराहना की व आयोजकों को अपनी शुभकामना दी। डा. मठपाल जी ने कुमाऊं अंचल कि प्रख्यात ऐपणकार लोक शिल्प कि कलाकार श्रीमती हरि प्रिया साह जी के द्वारा स्वनिर्मित (४०) चालीस साल पुराने डिकरों को भी दिखलाया। अपने सम्बोधन में जीवन वर्षा कला संगम समिति कि प्रगति जैन ने कहा कि उनकी संस्था का मुख्य उद्देश्य है कि विद्यार्थियों में कुमाऊंनी लोक-संस्कृति कि जानकारी को कार्यशाला के माध्यम से देना और उनकी संस्था कई वर्षों से इस कार्य में प्रयास रत है। लोक पर्व हरेला के शुभ अवसर पर उनकी संस्था के द्वारा जो यह प्रयास किया गया उसमें उनके साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था कि वर्षा , डा. प्रगति जैन, उमा पडालनी, पिंकी नायक तथा खष्टीबिष्ट आदि ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन डा.प्रगति जैन के द्वारा किया गया।

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