कुमाऊं विश्वविद्यालय के भीमताल स्थित भेषज विज्ञान विभाग में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत डा महेंद्र राणा को 10.36 लाख की शोध परियोजना प्राप्त हुई है

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नैनीताल l कुमाऊं विश्वविद्यालय के भीमताल स्थित भेषज विज्ञान विभाग में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत डा महेंद्र राणा को 10.36 लाख की शोध परियोजना प्राप्त हुई है। ज्ञात हो कि उच्च शिक्षा में शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की गई है। जिसके तहत राज्य सरकार द्वारा माह दिसंबर 2023 में राज्य में उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत प्राध्यापकों से शोध परियोजना के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त प्रस्तावों का आवश्यक स्क्रीनिंग करने एवं प्रस्तावकों द्वारा चरणबद्ध प्रस्तुतिकरण के उपरांत राज्य शोध एवं विकास प्रकोष्ठ चयन एवं मूल्यांकन समिति की अनुशंसा के पश्चात प्रधान अन्वेषकों को अनुमोदन जारी किए गए है और प्रथम किश्त जाती कर दी गई हैं। इसी के तहत कुमाऊं विश्वविद्यालय के भीमताल परिसर में स्थित भेषज विज्ञान विभाग में कार्यरत सह प्राध्यापक डा महेंद्र राणा को प्रधान अन्वेषक के रूप में ‘डेवलपमेंट ऑफ फार्माकोग्नोसटिक टूल्स फॉर वैल्यू एडिशन ऑफ मेडिसिनल प्लांट्स यूज्ड बाय लोकल हीलर्स इन द हाइलैंड्स ऑफ कुमाऊं’ विषय पर शोध परियोजना कार्य हेतु रू 10.36 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। उक्त शोध परियोजना में विभाग की ही प्रो अर्चना नेगी साह भी सहशोध अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगी। डा राणा ने बताया कि उक्त।शोध कार्य के द्वारा कुमाऊं क्षेत्र में जड़ी बूटियों के स्थानीय जानकार वैद्यों द्वारा प्रयोग में लाई जाने वाली विविध वनौषधियों के उन्नत प्रयोग हेतु भेषज विधि को विकसित करने हेतु शोधकार्य किया जायेगा। इस शोध से स्थानीय जन सामान्य को भी इसके प्रयोग की नवीन विधियों प्राप्त होंगी और इसके द्वारा स्थानीय जड़ी बूटियों को परिष्कृत स्वरूप में उपयोग किया जा सकता है। उत्तराखंड अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते सीमित संसाधनों में सिमटा हुआ है। उत्तराखण्ड में अनेक औषधीय एवं सगंध पादपों की आपार प्राकृतिक संपदा उपल्ब्ध है, जिसके कारण सरकार प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में हर्बल पौधों की संभावना को देखते हुए इस संरक्षण, संवर्धन एवं वैज्ञानिक दोहन पर काम करना शुरू कर दिया है। इन प्रयासों से राज्य में हर्बल काश्तकारों को न सिर्फ बड़ा फायदा होगा, बल्कि हर्बल प्रदेश के रूप में भी उत्तराखंड की भी अलग पहचान बनेगी। डॉ राणा ने बताया की प्रदेश में ऐसे अनेकों स्थानीय वैद्यों एवम प्राकृतिक चिकित्सकों के पास दुर्लभ बीमारियों के इलाज हेतु अनेक औषधीय गुणों से परिपूर्ण पादपों की जानकारी उपलब्ध है जो कि किसी भी तरह ही लिपिबद्ध नहीं हुई या जिस पर सीमित वैज्ञानिक अनुसंधान किया गाया हो, ऐसे पादपों की जानकारी प्रायः विरासत के रूप में गुरु शिष्य परंपरा से हस्तगत होती रही है। इस परियोजना के तहत ऐसे दुर्लभ जानकारियों का संकलन किए जाने के साथ ही परिष्करण हेतु वैज्ञानिक संयंत्र स्थापित किया जाएगा इस अवसर पर डॉo राणा ने बताया की उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड शासन के द्वारा नवाचार एवम नवोन्मेष के प्रोत्साहन हेतु संचलित इस योजना को प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध कार्य संस्कृति की स्थापना एवम विकास की दिशा में एक भागीरथ प्रयास है । माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी द्वारा निरंतर रूप से शोध एवं प्रसार को लेकर प्रोत्साहन दिया जाता रहा है और माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में 2025 में उत्तराखण्ड को आदर्श प्रदेश के रुप में स्थापित करने की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में माननीय मंत्री जी द्वारा प्रदेश में पहली बार राज्य स्तर पर शोध प्रोत्साहन योजना को संचालित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना से न केवल आदर्श राज्य स्थापना हेतु आवश्यक जानकारी का संकलन होगा वरन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शोध कार्यों में गतिशीलता आयेगी।
इस अवसर पर डॉ राणा द्वारा माननीय कुलपति जी द्वारा निरंतर रूप से शोध के क्षेत्र में कार्य करने हेतू शिक्षकों एवं शोधार्थियों को मार्गनिर्देशन दिया जा रहा है जिससे ना केवल अंतरिक शोध फंड्स की शुरूवात हुई है परंतु बाह्य शोध फंड्स हेतु भी निरंतर प्रयास करना का आवाहन किया जाता रहा है।
उन्ही की प्रेरणा से कुमाऊं विश्वविद्यालय को इस योजना के तहत 12 शोध परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है जिससे उच्च शिक्षा के विभिन्न आयामों पर शोध किया जाएगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारीयों, कार्मिकों सहित भीमताल के परिसर निदेशक, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवम भेषज विभाग के समस्त शिक्षकों, कार्मिकों एवं विद्यार्थियों ने डॉ राणा के निर्देशन में संचालित होने वाली इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर हर्ष व्यक्त किया।

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