कुविवि के कुलपति प्रो. दीवान एस. रावत द्वारा पद्मश्री प्रो. गोवर्धन मेहता से मुलाकात कर 18वें दीक्षांत समारोह में अनुमोदित डीएससी की मानद उपाधि दी गई दोनों शीर्ष वैज्ञानिकों के बीच हुआ ज्ञान और विचारों का आदान-प्रदान

नैनीताल l कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान एस. रावत ने हाल ही में हैदराबाद विश्वविद्यालय में डॉ. कल्लम अंजी रेड्डी चेयर, विश्व-प्रसिद्ध रसायनज्ञ और वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. गोवर्धन मेहता से मुलाकात कर 18वें दीक्षांत समारोह में अनुमोदित डीएससी की मानद उपाधि दी गई। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की प्रगति और नवाचारों से उन्हें अवगत कराना भी था। इस मुलाकात के दौरान दोनों वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान और विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

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प्रो. गोवर्धन मेहता भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के निदेशक रहे हैं, इससे पूर्व हैदराबाद विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर और कुलपति के रूप में कार्य कर चुके हैं। प्रो. मेहता ने 500 से ज़्यादा शोध पत्र लिखे हैं। उन्हें भारत/विदेश से 40 से ज़्यादा मानद डॉक्टरेट की उपाधियाँ मिल चुकी हैं और उन्होंने दुनिया भर के विश्वविद्यालयों/संस्थानों में 300 से ज़्यादा आमंत्रित व्याख्यान दिए हैं। वे प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद और कैबिनेट की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं। 1663 के बाद से 50 से भी कम भारतीयों को फेलो ऑफ़ रॉयल सोसाइटी (एफआरएस) के रूप में चुना गया है, प्रो. गोवर्धन मेहता उनमें से एक हैं। 1995 में, वे अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट रिसर्च अवार्ड पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बने। उन्हें ट्राइस्टे पुरस्कार, फ्रांसीसी पुरस्कार लीजन डी’होनूर और जर्मनी का प्रतिष्ठित क्रॉस ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ मेरिट (बुंडेस्वर्डिएन्स्ट्रेज़) पुरस्कार मिला है।

इस अवसर पर प्रो. दीवान एस. रावत ने कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की उपलब्धियों और वर्तमान में हो रहे नवाचारों और नवीन पहलों के बारे में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे विभिन्न अभिनव कदमों पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह ये कदम विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने हेतु आवश्यक हैं।

पद्मश्री प्रो. गोवर्धन मेहता ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के नवाचारों और नवीन पहलों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से सीएम अनुसंधान कार्यक्रम और उत्तराखंड सरकार की इंटर्नशिप नीति की प्रशंसा की। प्रो. मेहता ने कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय में हो रहे नवाचार और प्रयास सराहनीय हैं और अन्य विश्वविद्यालयों को भी अपने संस्थानों में इस तरह के प्रयास और प्रयोग करने चाहिए।

इस कार्यक्रम को जेसी बोस नेशनल फेलो प्रो. अश्वनी नंगिया, डीन ऑफ स्कूल ऑफ केमिकल साइंसेज, ने आयोजित किया। इस अवसर पर रसायन विज्ञान की सभी फैकल्टी भी उपस्थित थी।

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