एनएसएस विशेष शिविर का तृतीय दिवस : प्रकृति, ज्ञान और संस्कारों से जुड़ा रहा स्वयंसेवियों का दिन

नैनीताल l राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विशेष सात दिवसीय शिविर के तृतीय दिवस की शुरुआत प्रातः प्रभात जागरण से हुई। इसके पश्चात सभी स्वयंसेवियों ने योगाभ्यास एवं ईश्वर वंदना कर दिनचर्या का शुभारंभ किया। प्रातः चाय-नाश्ते के उपरांत स्वयंसेवियों द्वारा एनएसएस का लक्ष्य गीत गाया गया, जिससे शिविर स्थल अनुशासन और उत्साह से गूंज उठा।
तत्पश्चात सभी स्वयंसेवियों को एक शैक्षिक भ्रमण के अंतर्गत हिमालयन बॉटनिकल गार्डन ले जाया गया। जहा स्वयंसेवियों ने एक जन जागरूकता रैली भी निकाली और स्वच्छता के प्रति सभी को जागरूक किया गया वहां फॉरेस्ट बीट ऑफिसर श्री अरविंद कुमार द्वारा स्वयंसेवियों को उत्तराखंड में पाए जाने वाले विभिन्न औषधीय पौधों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि हमारे आसपास अनेक ऐसे औषधीय पौधे उपलब्ध हैं, जिनके उपयोग से हम अनभिज्ञ हैं। साथ ही उन्होंने विभिन्न विदेशी (एक्जॉटिक) पौधों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
भ्रमण के दौरान स्वयंसेवियों को कैक्टस गार्डन और संग्रहालय (म्यूज़ियम) भी दिखाया गया, जहाँ श्री अरविंद कुमार ने विभिन्न प्रकार के कैक्टस पौधों में अंतर करना, उनके उपयोग और पहचान के बारे में विस्तार से बताया। संग्रहालय में उन्होंने तितलियों और पतंगों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी दी तथा यह भी समझाया कि कई तितलियाँ विशिष्ट पौधों पर ही अपने अंडे देती हैं। उन्होंने वृक्षों के संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि यदि हम पेड़ों का अंधाधुंध कटान करेंगे तो ये जैव विविधताएँ क्षेत्र से पलायन कर जाएंगी।शैक्षिक भ्रमण के उपरांत स्वयंसेवियों ने भोजन किया, जिसके बाद उन्हें एडवेंचर पार्क, चारखेत ले जाया गया, जहाँ स्वयंसेवियों ने विभिन्न साहसिक गतिविधियों का आनंद लिया। सायं चाय-नाश्ते के पश्चात खेलकूद गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिससे सभी में आपसी सहयोग और टीम भावना का विकास हुआ।दिन के अंतिम चरण में भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण बना दिया। रात्रि भोजन के पश्चात स्वयंसेवियों के मध्य विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। अंत में संकल्प गीत के साथ तृतीय दिवस की दिनचर्या का समापन हुआ।इस पूरे दिन एनएसएस प्रभारी श्रीमती मीनाक्षी बिष्ट, निशा बनौला, आलोक भट्ट ,दिव्या, रवि और हिमांशु स्वयंसेवियों के साथ उपस्थित रहे तथा समय-समय पर उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करते रहे। तृतीय दिवस की गतिविधियों ने स्वयंसेवियों को प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।












