राष्ट्र चेतना के ऋषि महर्षि दयानन्द” विषय पर गोष्ठी संपन्न शिक्षा अध्यात्म व चारित्रिक विकास का स्रोत है-डॉ. रामचन्द्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय)

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “राष्ट्र चेतना के ऋषि महर्षि दयानन्द ” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। वैदिक विद्वान डॉ. राम चन्द्र (विभागाध्यक्ष संस्कृत,कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने भारत की राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने के सभी पक्षों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।शिक्षा व्यवस्था,राजधर्म, इतिहास,स्त्री शिक्षा,आर्ष गुरुकुल परम्परा,कृषि एवं गो रक्षा तथा वेदोद्धार आदि विविध हर क्षेत्र में महर्षि दयानंद सरस्वती का योगदान कालजयी एवं अतुलनीय है।अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में शिक्षा व्यवस्था की दृष्टि देते हुए महर्षि ने लिखा कि सबको तुल्य खानपान एवं वस्त्र दिए जाएं चाहे वह राजकुमार हो या दरिद्र की संतान हो।महाभारत युद्ध के बाद हमारे शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बहुत विकृत हो गई महर्षि दयानंद ने एक व्यापक शिक्षा पद्धति दी इसके द्वारा हम न केवल भौतिक विकास ही कर सकते हैं अपितु देश का आध्यात्मिक एवं चारित्रिक विकास भी कर सकते हैं।डॉ रामचंद्र ने कहा कि महर्षि दयानंद पहले महामानव थे जिन्होंने भारत के आत्म स्वरूप वेदों का हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया एवं ऋषियों के बीच के विरोध के स्वर को समाप्त करके दर्शनशास्त्र की एकता को विस्तारित किया।उन्होंने संस्कार विधि की रचना करके एक सम्पूर्ण एवं स्वस्थ मानव के निर्माण की आधारशिला रखी।महर्षि दयानंद को इस बात का भी श्रेय जाता है कि उन्होंने स्त्रियों के लिए वेदों को पढ़ने का दृढता पूर्वक समर्थन किया।वह महा मानव थे। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री सुनीता रसोट्रा व अध्यक्ष कुसुम भंडारी ने भी समाज उत्थान में महर्षि दयानन्द के योगदान की चर्चा की। परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन करते हुए समग्र क्रांति का अग्रदूत बताया।राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायिका रचना वर्मा, सुनीता अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया, कमला हंस, प्रवीना ठक्कर, रजनी चुघ, रजनी गर्ग आदि के मधुर भजन हुए।

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