हर तरफ राख है………..रूस यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन छोड़ दूसरे देशों में शरण ले रही महिलाओं का उत्पीड़न व दर्दनीय दशा ,,,, रश्मि रंजन की कलम से

अस्तित्वविहीन दर दर भटक रही हैं जिंदगी
आस्तित्व ढूंढ रहा हूं मैं टूटी जर्जर दीवारों में।

घर मेरा छत मेरी अब युद्ध की वेदी पर बैठी
धुंधली हवा हुई धूमिल जलती हुई चनारों में।।

शरणार्थी यह शब्द सुनते ही एक समय में और स्वाभाविक ही एक नाम याद आ जाता है “अस्तित्वविहीन”।
क्या आप कल्पना कर सकते है उस परिस्थिती को।
कब कहां नींद खुले, रात की शुरुआत कहां करनी है दिन तो फिर भी गुजर ही जाता है।
किसी सरकारी टेंट के किसी कोने में जगह मिल जाए जहां बड़ी मुश्किल से शरीर की अकड़ी हुई हड्डियों को सीधा कर पाने की संभावना होती।
पर यह शरीर की ऐठन तो भी सीधी होने की उम्मीद हो, पर भूख और प्यास से अतरियों में पड़ने वाले बल को कैसे सीधा किया जाए??
विदेशों का तो बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है पर भारत में शरणार्थियों की स्थिति बड़ी दयनीय है।
पर यहां मैं बात रही हूं युद्ध में विस्थापित हुए लोगों के बारे में।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद रूस युक्रेन युद्ध में विस्थापितों की संख्या उससे कहीं ज्यादा है।
न्यूज नेटवर्क के माध्यम से ऐसी कई घटनाऐं सुनने में आ रही है, जिसे सुन कर रोंगटे खड़े होते है।
बर्लिन के सेंट्रल स्टेशन पर पहुंच रहे यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए में पुलिस और वालंटियर लगे पड़े हैं। ऐसी शिकायतें भी आई हैं कि कुछ लोग महिलाओं की कमजोर स्थिति का फायदा उठा सकते हैं, खासकर उनका जो अकेले या फिर छोटे बच्चों के साथ आई हैं। पुलिस के माध्यम से ऐसी घटनाएं सामने आई है जब पुरुषों ने महिलाओं को लिफ्ट या फिर रहने की जगह का प्रस्ताव दिया। बड़ी संख्या में वालंटियर पुलिस के साथ ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं।
एक प्रवक्ता ने बताया, “एक महिला हमारे पास आई थी जिसके साथ ऐसी कोशिश की गई।” एक आदमी उसे मदद देने के बहाने अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रहा था, “हमें उसे स्टेशन से निकालना पड़ा।”
मोनिका चिसेक इवांस मानव तस्करी के शिकार लोगों के लिए एक काउंसलिंग सेंटर चलाती हैं, उनका कहना है, “अच्छा होगा कि जो लोग महिलाओं और बच्चों को अपने साथ ले जा रहे हैं, उनके नाम दर्ज किए जाएं, और जरूरी नहीं कि इस तरह के सिर्फ मर्द ही शरणार्थियों के सामने जाएं, महिलाओं पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।”
शरणार्थियों के साथ आस पास और भी देश कई पहल कर रहे हैं।
“हर तरफ राख है………” के अगले एपिसोड में इसी विषय पर होगी अगली स्टोरी।

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