कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी–एमएमटीटीसी द्वारा 9 मार्च से मंगलवार तक आयोजित ‘भारतीय साहित्य और भाषा’ विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का आज समापन हुआ

नैनीताल l कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी–एमएमटीटीसी द्वारा 9 मार्च से मंगलवार तक आयोजित ‘भारतीय साहित्य और भाषा’ विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का आज समापन हुआ।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज का यह समापन केवल एक औपचारिक पड़ाव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बौद्धिक यात्रा का चरण है। भाषा और साहित्य को उन्होंने समाज की चेतना, संस्कृति और इतिहास का सशक्त वाहक बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में मातृभाषा की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया। साथ ही उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
प्रो. लोहनी ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बहुभाषिकता एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने अंग्रेजी, फ्रेंच, जापानी और मंदारिन जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर बल देते हुए कहा कि “यदि हमें विश्व को समझना है, तो विश्व की भाषाओं को भी अपनाना होगा।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डिजिटल युग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में भाषा-अध्ययन को अधिक संवादपरक, तकनीक-सम्मत और समावेशी बनाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर एमएमटीटीसी के सह-निदेशक प्रो. रीतेश साह ने कहा कि इस पुनश्चर्या कार्यक्रम के दौरान हुए संवाद, विमर्श और विचारों के आदान-प्रदान ने प्रतिभागियों में नई शैक्षणिक ऊर्जा का संचार किया है। उन्होंने वर्तमान डिजिटल एवं वैश्विक परिदृश्य में अध्यापन और शोध को नवाचार, बहुभाषिकता और तकनीकी सशक्तता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से प्राप्त अनुभव प्रतिभागियों को उनके शैक्षणिक कार्यों में नई दिशा प्रदान करेंगे और यह समापन एक नई बौद्धिक यात्रा का प्रारंभ सिद्ध होगा।
निदेशक प्रो. दिव्या यू. जोशी ने कहा कि लगभग पखवाड़े तक चले इस शैक्षणिक आयोजन में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, बिहार एवं हिमाचल प्रदेश सहित देश के दस राज्यों से आए प्रतिभागियों ने छह विभिन्न भाषाओं के माध्यम से सक्रिय सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम को बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक आयाम प्राप्त हुआ।
रिफ्रेशर कोर्स समन्वयक प्रो. एल. एम. जोशी ने कहा कि कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विद्वानों, भाषाविदों, आलोचकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के व्याख्यान रहे। इन सत्रों ने प्रतिभागियों के ज्ञान को समृद्ध करने के साथ-साथ उन्हें समकालीन साहित्यिक और भाषाई विमर्शों से भी गहराई से जोड़ा।
कार्यक्रम का संचालन डे ऑफिसर चंद्रिका चौधरी ने किया। कार्यक्रम की सफलता में डॉ. राजेंद्र बोरा, जितेंद्र बिष्ट, जसौद बिष्ट, इंद्र सिंह नेगी, अरविंद सिंह, कैलाश जोशी, राजेंद्र बिष्ट, कमल, सुरेंद्र सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।












