पारम्परिक आहार सुख का आधार” पर गोष्ठी संपन्न परम्परागत आहार स्वास्थ्य के लिये वरदान है -प्रो. करुणा चांदना

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नैनीताल l केंद्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “परम्परागत आहार सुख का आधार” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। य़ह कोरोना काल से 618 वाँ वेबिनार था। मुख्य वक्ता प्रो. करुणा चांदना ने कहा कि भारत भोजन के मामले में अनंत विविधताओं का खजाना है हर क्षेत्र की अपनी सुगंध,स्वाद, मसाले और परंपरा से जुड़े व्यंजन पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।यह पारंपरिक आहार सिर्फ आहार नहीं बल्कि संजीव सांस्कृतिक विरासत,त्योहार धार्मिक संस्कारों का हिस्सा है।पारंपरिक भोजन एक ऐसा पाक खजाना है जो एक जेनरेशन से दूसरी जेनरेशन तक पास किया जाता है यह स्वाद से भरपूर,अद्भुत सामग्री के साथ विशेष खुशबू लिए हुए संस्कृति तथा ऐतिहासिक यात्रा का आईना है।यह शरीर को केवल पोषण नहीं देता बल्कि आत्मा को भी पोषण देता है यह सरल प्राकृतिक सोच समझकर तैयार किए जाने वाला आहार है।भारत के विभिन्न क्षेत्रों के विभिन्न व्यंजन लोकप्रिय हैं क्योंकि हर क्षेत्र का क्लाइमेट, मिट्टी,कल्चर,अलग होता है उसे हिसाब से उनकी पौष्टिकता होती है यहां तक कि उनमें उसी हिसाब से ही औषधीय गुण पाए जाते हैं। वास्तव में हमारा शरीर मौसम के अनुसार तथा स्थानीय उपलब्ध खाद्य पदार्थों को पचाने में आत्मसात करने के लिए बना है ऐसा नहीं कि आप किसी भी भोजन को खाना शुरू कर दें वह उस समय तो आपको कुछ स्वाद जरूर दे देगा लेकिन बाद में वह किसी परेशानियों को निमंत्रण
दे सकता है।अंत में हम कह सकते हैं की भोजन संस्कृति का तथा पाक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है समय आ गया है जब हमें संस्कृति के माध्यम से इस पारंपरिक आहार को सुरक्षित करके विकृत होने से बचा लें क्योंकि यह हमारी सेहत संस्कृति और समृद्धि को भी बढ़ाने में बहुत योगदान देता है अतः इसे बचाए रखना समर्थन करना हम सब की जिम्मेवारी है क्योंकि यही आहार है जो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने अपने पूर्वजों को याद करने का माध्यम है।आइए इन पारंपरिक व्यंजनों को सहेजे तथा अपने बच्चों को भी इसका स्वाद चखने का अवसर दें यही हमारी संस्कृति और विरासत को जीवंत रखेगा तथा हमारे सुख का आधार बनेगा।

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मुख्य अतिथि आर्य नेत्री कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष डॉ. कल्पना रस्तोगी ने भी घर के भोजन की महत्ता पर चर्चा की।

परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया।राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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गायिका प्रवीना ठक्कर, रविन्द्र गुप्ता, कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, कमला हंस, सुनीता अरोड़ा आदि के मधुर भजन हुए।

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