मेरी माँ है वो जो मुझे हसाती -दुलारती ,त्याग और मेहनत से मेरे जीवन को सवारती ::::::(हैप्पी मदर्स डे)

मां और बच्चे का रिश्ता दुनिया में सबसे अहम और अनमोल होता है। मां से रिश्ता होने के बाद ही एक बच्चा बड़ा होने तक अपने जीवन में कई और रिश्तों को अपना सकता है। मां की ममता और प्यार हर इंसान के लिए बहुत जरूरी होती है। मां बच्चे की इस जरूरत को बिना किसी स्वार्थ के पूरा करती है। वैसे तो मां अपने बच्चे पर अपना पूरा जीवन कुर्बान कर देतीं हैं। बच्चे की खुशी में खुश और तकलीफों में दर्द बांटती है। ऐसे में बच्चे अपनी मां के लिए कुछ खास करना चाहते हैं। मां की इसी ममता और प्यार को सम्मान देने के लिए एक खास दिन होता है। इस दिन को मदर्स डे कहते हैं। हर साल मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इस साल 8 मई को मदर्स डे मनाया जा रहा है। लोग इस दिन अपनी मां को खास महसूस कराकर उन्हें यह बताने की कोशिश करते हैं कि उनके जीवन में मां की क्या भूमिका है और वह भी मां से प्यार करते हैं। मदर्स डे भारत में ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है।
सबसे पहले मदर्स डे किसने मनाया?
दरअसल, मदर्स डे मनाने की शुरुआत एना जार्विस नाम की एक अमेरिकी महिला ने की थी। एना अपनी मां को आदर्श मानती थीं और उनसे बहुत प्यार करती थीं। जब एना की मां की निधन हुआ तो उन्होंने कभी शादी न करने का फैसला करते हुए अपनी मां के नाम अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मां को सम्मान देने के लिए मदर्स डे मनाने की शुरुआत की। उन दिनों यूरोप में इस खास दिन को मदरिंग संडे कहा जाता था।
माँ अगर तुम न होती तो मुझे समझाता कौन…
काँटो भरी इस मुश्किल राह पर चलना सिखाता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे लोरी सुनाता कौन…
खुद जागकर सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे चलना सिखलाता कौन…
ठोकर लगने पर रस्ते पर हाथ पकड़ कर संभालता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे बोलना सिखाता कौन…
बचपन के अ, आ, ई, पढ़ना-लिखना सिखाता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे हँसना सिखाता कौन…
गलती करने पर पापा की डाँट से बचाता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे परिवार का प्यार दिलाता कौन…
सब रिश्ते और नातों से मेरी मुलाकात कराता कौन….
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे गलती करने से रोकता कौन…
सही क्या हैं, गलत क्या हैं इसका फर्क बताता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे ‘प्यारी लाड़ो’ कहता कौन…
‘मेरी राज-दुलारी प्यारी बिटिया’ कहकर गले लगाता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मुझे समाज मैं रहना सीखाता कौन…
तुम्हारे बिना ओ मेरी माँ मेरा अस्तित्व स्वीकारता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…
माँ अगर तुम न होती तो मेरा हौसला बढ़ाता कौन…
नारी की तीनों शक्ति से मुझे परिचित कराता कौन…
माँ अगर तुम न होती तो…








