कुमाऊं विश्वविद्यालय में 30 मार्च को जल प्रबंधन पर अंतरविषयी संगोष्ठी


नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री रहेंगे मुख्य वक्ता, एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र आईसीआईएमओडी के विशेषज्ञ होंगे मुख्य अतिथि
नैनीताल, 25 मार्च
कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग एवं यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) के संयुक्त तत्वावधान में 30 मार्च 2026 को एक दिवसीय अंतरविषयी संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी आयोजन सचिव प्रो. रीतेश साह ने दी।
संगोष्ठी का विषय “पारंपरिक जल प्रबंधन, स्वदेशी ज्ञान और हिमालयी क्षेत्र (भारत-नेपाल) में सतत भविष्य” रखा गया है। प्रो. साह ने बताया कि यह संगोष्ठी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत चल रही उनकी एक शोध परियोजना का हिस्सा है, जिसमें उत्तराखंड के मानसखंड क्षेत्र तथा नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में पारंपरिक जल प्रबंधन तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित ‘द हर्मिटेज’ में प्रातः 10:00 बजे से आयोजित होगा। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में आईसीआईएमओडी, काठमांडू के वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार भुचर उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र सिंह रावल इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगे। इसके अतिरिक्त प्रो. वसुंधा पांडेय (दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. राजेश खरात (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) तथा प्रो. पी.सी. तिवारी (कुमाऊं विश्वविद्यालय) विभिन्न सत्रों में संबोधित करेंगे।
संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पारंपरिक ज्ञान, पारिस्थितिकी, समाज, संस्कृति एवं अंतरसीमाई जल प्रबंधन से जुड़े विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
संगोष्ठी के समन्वयक व विभागाध्यक्ष इतिहास प्रो संजय घिल्डियाल ने बताया कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों की प्रासंगिकता को पुनर्स्थापित करना तथा सतत विकास के लिए स्वदेशी ज्ञान को बढ़ावा देना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से इसमें सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।