22 मई 2022, प्रातः 8.56 पर भारत प्रदक्षिणा से राष्ट्र वंदना अमृत महोत्सव

नई दिल्ली. स्वतन्त्रता का अमृत महोत्सव, एक अत्यंत विशेष वर्ष है. भारत की स्वतन्त्रता के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में सार्थकता की अनुभूति भी है और बहुत आशा, अपेक्षा के साथ भारत के उज्ज्वल भविष्य का विश्वास भी. भारत के खेल जगत में इसी वर्ष में, कोरोना के बावजूद अनेक शुभ संकेत आए हैं. खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलना, उसी के साथ ओलिम्पिक तथा पैरालिम्पिक में देश के लिये अब तक के रिकॉर्ड मेडल. ट्रैक एंड फील्ड का पहला स्वर्ण पदक, सम्पूर्ण सरकारी तंत्र तथा भारत की जनता का ओलिम्पिक के लिए अभूतपूर्व सहयोग, सरकार के विशेष प्रयास का प्रभाव भारत के खेल क्षेत्र में स्पष्ट दिख रहा है. इसी पार्श्वभूमि पर, कोरोना के रहते हुवे भी, क्रीड़ा भारती ने व्यापक संपर्क के साथ संपूर्ण देश में सम्मेलनों का क्रम पूर्ण किया. और सम्मेलन के तुरंत बाद चार संस्थाओं के साथ 75 करोड़ सूर्य नमस्कार उपक्रम संपूर्ण देश में पूर्ण किया. इतनी अनुकूल परिस्थिति में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर क्रीड़ा-भारती और अधिक योगदान कैसे दे सकती है? हर एक पीढ़ी के अपने इतिहास की कुछ कहानियां होती हैं, ऐसा इतिहास जिसके स्वयं साक्षी हैं, जिसे स्वयं बनते देखा है और जिसे बनाने में अपना योगदान है. अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में ऐसा ही एक विशेष कार्यक्रम युवाओं के लिए तय किया गया है, जिसमें उनकी एक कहानी बने, उत्साह हो, गति हो, अनुशासन हो, आनन्द के साथ प्रवास हो, और संपूर्ण देश एक साथ हो. इसी चिंतन से एक कल्पना ने जन्म लिया….

मां भारती की अभिनव अर्चना…क्रीड़ा- भारती के साथ राष्ट्र की प्रदक्षिणा…एक साथ, एक समय….भारत प्रदक्षिणा की संकल्पना—

एक ही दिन, एक ही समय पूरे देश में लगभग 225 स्थान से युवाओं की वाहन रैली का प्रारंभप्रत्येक जत्थे में कम से कम 75 युवक-युवतीप्रत्येक जत्था 75 km दूरी तय करे, और एक अखंड शृंखला बने.संपूर्ण कार्यक्रम एक ही दिन में लगभग 3 घंटे में समाप्त होगा.वाहन रैली के साथ सबसे आगे भारत माता की प्रतिमा व राष्ट्र ध्वज तथा अपने-अपने क्षेत्र के क्रातिकारियों का चित्ररथ रहे.स्थानीय खिलाड़ी, प्रशिक्षक, साहित्य विक्रेता, क्रीड़ा प्रेमी नागरिकों रैली में शामिल करना.स्थानीक क्रीड़ा संगठन, प्रशिक्षण संस्थान भी सम्मिलित हों.सभी 225 स्थानों पर यात्रा एक ही समय प्रातः 8.56 पर प्रारंभ होगी.यह रेस (दौड़) नहीं है. खेल का प्रचार, क्रीड़ा-भारती का संस्कार और राष्ट्रवंदन की भावना लेकर हमें एक साथ चलना है.

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