काव्य- धारा की श्रृंखला मै एक कविता पहाड़ के लाल के लिए जिनकी पहचान सरलता और सादगी है। पद्मभूषण से सम्मानित एक राजनेता जिसमे बसता है संपूर्ण पहाड़।

काव्य- धारा की श्रृंखला मै एक कविता पहाड़ के लाल के लिए जिनकी पहचान सरलता और सादगी है। पद्मभूषण से सम्मानित एक राजनेता जिसमे बसता है संपूर्ण पहाड़।

प्रेरणा संपूर्ण पहाड़ की पद्मभूषण भगत दा…….

पहाड़ का संघर्ष
और मजबूत इरादे
जब अपना आकार गड़ते हैं,
तब प्रस्फुटित होती है
एक प्रेरणा,
जो कह जाती है अनूठी कहानी और
शिखर बस ताकता रह जाता हैं।
“भगत दा ” जो सादगी की मिसाल हैं, एक लेखक, चिंतक, राजनीति के जिनके अलग पायदान हैँ।
,
बटिया में चलते उस आम पहाड़ी के दिलों में बसते हैं।

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आज सम्मान के स्वर
और ये आदर के भाव पुनः रचना चाहते हैँ एक पँक्ति जो उपासना बन
गूंज उठे,
देवभूमि में।

पहाड़ का लाल इसी तरह
फहराते रहे अभिमान की ये विजय पताका और संपूर्ण जनमानस गर्व करता रहे,
उत्तराखंडियत पर।

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-अनुपम उपाध्याय

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