हर तरफ राख है……यूक्रेन रूस युद्ध की विभीषिका दिल दहलाने वाली है। युद्ध की त्रासदी का एक छोटा सा अंश रश्मि रंजन की कलम से।

भटक रहा हूं धुंध में ढूंढता अपना अस्तित्व हूं
खो गया जो भीड़ में हूं बिलखता मैं सत्य हूं।

छूटा घर, मैं दर ब दर निरंकुश सा कृत्य है
जर्जर दीवारों से अब दफन यादें मेरी मृत्य है।।

युद्ध का दूसरा चरण पलायन होता है जिसे युद्ध करने वाले दोनो देश नहीं, सरकार या प्रशासन नहीं बल्कि जीते हैं वो लोग जो उस युद्ध में लड़ते नहीं है पर मरते जरूर है।
आम नागरिक – सिविलियंस।
24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत हुई थी। यूएन के रिसर्च के अनुसार यूक्रेनी नागरिकों का पलायन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे तेजी से बढ़ता शरणार्थी संकट है।
रूसी सेना का मारियुपोल पर कब्जा और पुतिन ने किया जीत का ऐलान, बोले-हमने शहर को आजाद किया।
इन सभी माध्यमों से परिस्थिति विशेष पर अपनी राय लिखने भरकस कोशिश हम करते हैं।
टीवी चैनल जब ये खबरें रेंग रही होती है और खबरों के बाद खबरों का सटीक विश्लेषण तो लिविंग रूम में सही मायने में होता है।

इरयाना अब्रामोव जिनके पति को गोली मार दी गई।
एक यूक्रेनी महिला, जिनके इकलौते बेटे को रूसी सैनिकों ने मारकर बीच सड़क छोड़ दिया।
क्रिस्टिना नाम की एक स्थानीय महिला ने द इनसाइडर को बताया, “ये डरावने दिन हैं। ऐसे दिन जब आपका घरबार और जायदाद भी आपके अपने नहीं है। आपकी ज़िंदगी भी अपनी नहीं है। न पानी है, न बिजली, न गैस। घर छोड़ने की पाबंदी है। अगर आप निकले तो गोली मार दी जाएगी।”

62 वर्षीय नीना विन्येक अपनी पोती डेन्यलो के साथ विध्वस्त हो गए घर को बार बार देखने जाती है। डेन्यलो की मां 39 वर्षीय लुडम्याला ने हमले में
अपना एक पैर खो दिया है और अब वह अस्पताल में हैं। नीना कहती है सब कुछ एक भयानक स्वप्न सा है और वास्तविकता में मैं ऐसे स्वपन कभी नही देखना चाहूंगी।
इरयाना,क्रिस्टिना या नीना विन्येक की तकलीफों का विश्लेषण कर पायेंगे क्या??
क्या शहर आजाद हुआ या बर्बाद???
क्या इस आजादी का वो लोग जश्न मनाए जिन्हें अपना घर, सामान जीवन भर की पूंजी सब छोड़ कर पलायन करना पड़ा?

रश्मि रंजन

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