हर तरफ राख है……विवशता ये मेरी और आत्मग्लानि से शोभित मनविचारता है किस तरह हो राख की तपिश ये कम धुंध में उलझता रोता मानवता हुआ बोझिल स्वरयुद्ध ये तीव्र है तीव्रता के शोर बिलखता है बचपन
57वां दिन
आज फिर कुछ हिस्से जो मार्मिक है और लेखन के माध्यम से चित्रण करते हुए ऐसा अनुभव होता है कि हृदय कुछ और कहना चाहता है मस्तिष्क में अलग ही उथल पुथल मची है।
फिर से न्यूज़ पेपर, डिजिटल मीडिया आदि का सही में तहे दिल से आभार।
इन सभी माध्यमों से परिस्थिति विशेष पर एक महिला एक मां होने के नाते अपनी पक्ष रखने की कोशिश जारी रहेगी।
तीन साल से कम उम्र का अर्तेम जिसके पेट में दाग़े गए गोले का छर्रा घुस गया। अर्तेम के माता-पिता और दादा-दादी भी बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए।
घायल परिवार और अर्तेम की स्तिथि उस बच्चे के शरीर पर इसके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे नहीं पता।
अर्तेम के बगल के बेड पर 15 साल की माशा को बीते मंगलवार गोलाबारी के दौरान हुए धमाके में दाहिना पैर ज़ख़्मी हो गया और अब इसे काटना पड़ा है। 15 साल की बच्ची जिसका पूरा भविष्य उसके सामने खड़ा हो उससे क्या पूछ पायेंगे कि आप आगे चलकर क्या बनना चाहते हो।
यूक्रेन का एक बच्चा अपने मां-बाप से बिछड़ गया है। वह रोते हुए पोलैंड बॉर्डर की (Ukrainian boy crying) ओर जाते हुए नजर आ रहा है। बच्चे के हाथ में कुछ खिलौने और चॉकलेट हैं।
इन महिलाओं और बच्चों का भविष्य क्या होगा??
क्या आप कल्पना कर सकते है??
किस्से तो बहुत सारे है —- किस्से इसलिए क्योंकि आप बस इसे पढ़ रहे है और अनगिनत कई कहानियों की तरह या कई युद्धों की तरह एक प्रसंग का पिछला हिस्सा मात्र रह जाए।
रश्मि रंजन








