हर तरफ राख है……यूक्रेन रूस युद्ध की तस्वीर रश्मि रंजन की कलम से..

क्या विकट परिस्थिति है
अवसाद ग्रस्त मन मेरा
लिख रही हूं दर्द अपना, दर्द की टूटी कलम से।

बिक रही भीड़ में, कर न पाओ तुम शामिल मुझे
जतन से समेट रही हूं मैं ख़्वाब सारे चमन से।।

यहां एक तरफ रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध और दूसरी ओर इस युद्ध में शामिल कुछ महिलाओं के खूब चर्चे हो रहे है। इन महिलाओं ने युद्ध के दौरान कई लोगों को मार डाला इन्हें “लेडी लेथ Lady death” के नाम से जाना जाता है।
इनमें से एक नाम काफी सुर्खियों में रहा, यूक्रेनी सेना ने एक रूस की इरीना स्टारिकोवा नाम की एक महिला स्नाइपर को गिरफ्तार किया जिसने 40 लोगों की हत्या की थी।
रूस की ओर से क्रीमिया पर कब्जा करने के प्रयासों के बीच यूक्रेन की महिलाओं में इसके प्रति काफी रोष है। इससे नाराज यूक्रेनी महिलाओं के एक ग्रुप ने रूस के खिलाफ एक अनोखा अभियान छेड़ा है। इस ग्रुप की फाउंडर कटरीना वैजाहिक ने कहा कि “क्रीमिया में रूस की नीतियों के प्रति लोगों का ध्यान खींचने के लिए इस अभियान की शुरूआत की है। उन्होंने रूसी सैनिकों के खिलाफ सेक्स स्ट्राइक पर जाने का फैसला किया है। इसके लिए बकायदा कैपेंन भी चलाई जिसमें कहा गया है कि यूक्रेनी महिलाएं रूसी सैनिकों के साथ सेक्स न करें।”
इस अभियान में शामिल महिलाओं ने एक विशेष टी-शर्ट भी डिजाइन करवाई है। इस पर एक स्लोगन लिखा है प्यार में गिरो, लेकिन रूसियों के साथ नहीं। कैंपेन के दौरान वे टी-शर्ट्स को भी बेचेंगे और इससे होने वाली आय को यूक्रेन की सेना को देंगे।

यहां मैं आपके साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की पत्नी ओलीना जेलेंस्की ने इंस्टाग्राम पोस्ट के कुछ अंश शेयर कर रही हूं, पढ़ने के बाद का अनुभव शायद आपका भी मेरे जैसा ही हो।
“युद्ध से पहले (ये कहना कितना डरावना और अभी भी असामान्य है) मैंने एक बार लिखा था कि यूक्रेन में पुरुषों की तुलना में दो मिलियन अधिक महिलाएं हैं। बस आंकड़े, लेकिन अब यह बिल्कुल नया अर्थ ले रहा है। क्योंकि इसका मतलब है कि हमारे डिफेंस में विशेष रूप से औरतों का चेहरा नज़र आ रहा है… मेरे अविश्वसनीय हमवतन, मेरा आपको नमन… वो लोग जो आर्म्ड फोर्सेस की रैंक्स में शामिल होकर लड़ रहे हैं, वो लोग जो डिफेंस में शामिल हुए, वो लोग जो घायलों का इलाज कर रहे हैं, लोगों को बचा रहे हैं, उन्हें खाना खिला रहे हैं। ज़रूरी सामान उपलब्ध कराने वाले वॉलंटियर्स। फार्मेसी, दुकानों, परिवहन, यूटिलिटी सेवाओं से जुड़े लोग जो बिना रुके अपना काम कर रहे हैं ताकि सामान्य लोगों का जीवन चलता रहे… वो लोग जो हर दिन बच्चों को शेल्टर्स में रख रहे हैं और कार्टून और खेलों से उनका मनोरंजन कर रहे हैं, ताकि उनका मन युद्ध से बचा रहे। वो लोग जो बम शेल्टर्स में जन्म दे रहे हैं…आज वसंत का पहला दिन है। याद है, युद्ध से पहले (फिर से, वो डरावना वाक्यांश) हमने कैसे एक दूसरे को इस दिन की बधाई दी थी?.. बमबारी के धुएं के उस पार सूरज दिखने लगा है। सबकुछ वसंत होगा। सबकुछ जीत होगा, सबकुछ यूक्रेन होगा…”

एक उम्मीद…… एक खूबसूरत कल की….. संवेदनाओं का ऐसा पुलिंदा जो कमजोर दिखता तो है, पर है नहीं…..सबकुछ यूक्रेन होगा… या मैं अपनी कहानी का शीर्षक बदल दूं क्या हर तरफ राख है……???

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