सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट आर.पी. उपाध्याय 37 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त

हल्द्वानी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डिप्टी कमांडेंट श्री आर.पी. उपाध्याय 37 वर्ष की विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण सेवा के बाद 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो गए। वर्ष 1988 में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सीधी भर्ती होकर BSF में शामिल हुए उपाध्याय ने अपने करियर की शुरुआत उन इलाकों से की, जहाँ सेवा करना ही अपने आप में एक कठोर परीक्षा मानी जाती है। कश्मीर घाटी में 1990 से 1997 तक उन्होंने आतंकवाद का सामना किया और दुर्गम परिस्थितियों में अपनी यूनिट का नेतृत्व किया। इसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर लंबे समय तक तैनाती के दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। लद्दाख की शून्य से नीचे तापमान वाली प्रणालियाँ, थार के रेगिस्तान की तपिश, उत्तर-पूर्व के घने जंगल और मणिपुर की जटिल कानून-व्यवस्था—इन सभी मोर्चों पर उन्होंने अदम्य साहस के साथ कर्तव्य निभाया। उपाध्याय ने रिक्रूट प्रशिक्षण केंद्र कश्मीर तथा छावला (नई दिल्ली) में प्रशासनिक पदों पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैसलमेर में सतर्कता विभाग में कार्य करते हुए उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को सुलझाया। उनकी निष्ठा, परिश्रम और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें बीएसएफ के सर्वोच्च पुरस्कारों में शामिल महानिदेशक प्रशस्ति पत्र नौ बार, अतिरिक्त महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एक बार और महानिरीक्षक प्रशस्ति पत्र पाँच बार प्राप्त हुए। इतने अधिक प्रशस्ति पत्र किसी भी अधिकारी की उत्कृष्ट सेवा का प्रमाण हैं और उपाध्याय की छवि को एक अत्यंत ईमानदार, अनुशासित और सजग अधिकारी के रूप में स्थापित करते हैं। आर.पी. उपाध्याय, शिक्षा और खेल-कूद में भी उतने ही तेजस्वी रहे। नैनीताल में कक्षा पाँच से लेकर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई पूरी करते हुए उन्होंने एनसीसी में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेना, केरल में तीन माह की याचिंग ट्रेनिंग पूरी कर के ‘B’ और ‘C’ सर्टिफिकेट हासिल करना, पर्वतारोहण में ‘A’ ग्रेड प्राप्त करना और नॉर्थ इंडिया कराटे प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना—ये सब उनकी युवावस्था की उपलब्धियाँ हैं, जो उनके जुझारू और अनुशासित व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। पिथौरागढ़ जिले के ग्राम गणाई गंगोली के मूल निवासी उपाध्याय वर्तमान में हल्द्वानी के लोहरिया साल तल्ला क्षेत्र में रहते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद योजनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यदि देश को उनकी फिर कभी आवश्यकता पड़ी तो वे सेवा के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे। उनकी सेवानिवृत्ति न केवल सीमा सुरक्षा बल के लिए, बल्कि कुमाऊँ और उत्तराखंड के लिए भी गर्व का अवसर है।









