उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय में बायोटेक्नोलॉजी स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ

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नैनीताल l पटवाडांगर स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय में शुक्रवार को ‘बायोटेक्नोलॉजी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं परिषद् के निदेशक डा. संजय कुमार व कुमाऊं विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डा. सुषमा टम्टा ने किया। परिषद के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने सभा व युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा बॉयोटैक्नोलॉजिस्ट व वैज्ञानिक देश का भविष्य हैं। उन्होंने रेड, ग्रीन, व्हॉइट ब्लू व येलो बायोटेक्नोलॉजी पर प्रकाश डाला व कहा बॉयोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बॉयोफार्मास्यूटिल का 60 प्रतिशत योगदान है। कहा कि बॉयोटेक्नोलॉजी की दृष्टि से उत्तराखंड सबसे बेहतरीन राज्य है क्योंकि यहां पर जड़ी बूटियां की बहुतायत है। इनसे कई गंभीर रोगों में कारगर औषधीय दवाईयां बनाई जा सकती हैं। उन्होंने क्लोन तकनीक पर भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बॉयोटेक्नोलॉजी व जेनेटिक फेरबदल करके ऐसी गाय विकसित की जा सकती है जो कम से कम प्रतिदिन उच्च गुणवत्ता वाला पांच लीटर तक दूध उत्पादन कर सकती है। पटवाडांगर स्थित संस्थान के प्रभारी व वैज्ञानिक डा. सुमित पुरोहित ने संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डाला। कहा कि मौजूदा समय में पटवाडांगर में टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में कीवी एवं अन्य फल विकसित किए जा रहे हैं। यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है। अब बिना मिट्टी के खेती की तकनीक को किसानों की पहुंच तक पहुंचाने की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इस तरह संस्थान में हो रहे शोध कार्य भविष्य में उत्तराखंड के विकास की नईकहानी लिखने में सक्षम होंगे। कुमाऊं विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डा. सुषमा टम्टा ने प्लांट टिश्यू कल्चर विधि पर प्राजेंटेशन के जरिए व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में करीब 70 युवा वैज्ञानिकों व शोधार्थियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान आरती बिष्ट, अजय सिंह, प्रीतम सिंह, प्रदीप कुमार, हिम्मत सिंह, प्रदीप कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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